अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावा चोरी में अब तक 70 बार चोरी…..

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स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम (एसआइट)  की 9  पन्नों की प्राथमिक रिपोर्ट ने ही राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी के मामले में बड़ा खुलासा कर दिया। इसमें पूरे सिस्टम ने मिलकर राम के नाम पर जमकर लूट को अंजाम दिया।

भगवान राम की जन्मभूमि में  उनके ही मंदिर के चढ़ावे में चोरी।  ये इस वक्त सब बड़ा धार्मिक, सामजिक और राजनीतिक मुद्दा है। ट्रस्ट पर कार्रवाई हुई। मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख चंपत राय, अनिल मिश्रा का इस्तीफा हो गया। मंदिर ट्रस्ट ने चोरी के आरोपों के करीब एक महीने बाद वो सब सामने रखकर खुद  बेगुनाह साबित करने की कोशिश की जिन वस्तुओं के चोरी हो जाने का सवाल मीडिया में उठता रहा।

सवाल यही है कि इन सब कथित रूप से चोरी हुए सामान को सामने लाकर दिखाने में इतना वक्त क्यों लगा। ये मुद्दा राजनीतिक और कानूनी रूप से चलता रहेगा। पर ये जान लेना भी ‘जरुरी है कि एसआईटी की रिपोर्ट ने क्या बताया। कुल कितनी चोरी अब तक पकड़ी गई और चोरी का रास्ता कैसे निकला।

रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर के चढ़ावे में से चोरी की 70 घटनाएं सामने आईं। तलाशी के नियमों को नजरअंदाज किया गया, गिनती में गड़बड़ी पाई गई। अयोध्या में राम मंदिर में दान की  चोरी की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने अपनी नौ पन्नों की शुरुआती रिपोर्ट में सुपरविज़न (निगरानी), कैमरे मॉनिटरिंग और कैश-गिनती की प्रक्रियाओं में कई सिस्टम से जुड़ी कमियों की ओर इशारा किया है।

इस रिपोर्ट के आधार  पर इन कमियों को समझते हैं-

1. सुपरविज़न में कमियां

टीम  ने पाया कि गिनती की प्रक्रिया में शामिल कई कर्मचारी तय सुरक्षा नियमों का पालन करने में नाकाम रहे। इसने सुपरविज़न में गंभीर कमियों की ओर इशारा किया, जिनके बारे में कहा गया कि इनसे कथित आपराधिक गतिविधियों के लिए हालात बने। जांच टीम ने उन लोगों को लेकर गंभीर चिंता जताई जो बिना किसी स्पष्ट लिखित अधिकार के दान पेटियों की चाबियां संभालते थे या एक्सेस से जुड़े इंतजाम देखते थे।

इनमें आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू भी शामिल है, जो चंपत राय के करीबी माने जाते हैं। चंपत राय ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। रिपोर्ट पोर्ट में आरोपी सुभाष श्रीवास्तव को भी इस अनौपचारिक व्यवस्था को जारी रखने की इजाजत देने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया। सुभाष श्रीवास्तव गिनती के इंचार्ज थे और इस मामले में गिरफ्तार किए गए, वे पेटियां खोलने की प्रक्रिया की निगरानी करने वाले अधिकारी थे।

 2 . सीसीटीवी में निगरानी की कमी,छेड़छाड़

जांच रिपोर्ट मेंसीसीटीवी  निगरानी और रिकॉर्ड रखने के तरीके में बड़ी कमियां पाई गईं। हालांकि काउंटिंग रूम में कैमरे लगाए गए थे, लेकिन ट्रस्ट के कर्मचारी लाइव फुटेज की ठीक से निगरानी करने में नाकाम रहे। फुटेज को 180 दिनों तक सुरक्षित रखने की पिछली ऑडिट सिफारिशों के बावजूद, रिकॉर्डिंग को केवल 45 दिनों ( 27 अप्रैल से 6 जून तक)  के लिए ही सुरक्षित रखा गया था। इस सीमित अवधि के दौरान, जांचकर्ताओं ने कथित चोरी या गबन के 70 मामलों की पहचान की।जांच टीम  ने कहा कि कथित चोरी शायद 27 अप्रैल से पहले ही शुरू हो गई थी, लेकिन पहले के फुटेज न होने के कारण पहले हुई चोरी के दायरे का पता लगाना असंभव था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध फुटेज में बार-बार कुछ कर्मचारियों को नोटों की गड्डियों और खुले कैश को अपने कपड़ों, जेबों, जूतों या अन्य छिपी हुई जगहों पर छिपाते हुए देखा गया। कई मामलों में, अन्य कर्मचारी मदद करते या आड़ देते हुए दिखाई दिए।

3. सुरक्षा में चूक

सुरक्षा में कई तरह की चूक सामने आई। ऐसी चूक के कारण कथित चोरियों का पता नहीं चल पाया। काउंटिंग रूम में आते-जाते समय कर्मचारियों की ठीक से तलाशी नहीं ली गई तय ड्रेस कोड को सख्ती से लागू नहीं किया गया। व्यक्तिगत सामान पर प्रभावी ढंग से रोक नहीं लगाई गई। हर हुंडी के लिए दान की अलग-अलग गिनती नहीं की गई नोटों के मूल्य (डिनोमिनेशन) के हिसाब से रिकॉर्ड ठीक से नहीं रखे गए।

4. गिनती में  SOP का पालन नहीं

जान रिपोर्ट में टीम  ने खराब निगरानी की ओर भी इशारा किया और कहा कि गिनती की प्रक्रिया के दौरान ट्रस्ट और बैंक दोनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बावजूद ये कमियां बनी रहीं। इसने तलाशी के नियमों में बदलाव पर भी चिंता जताई। सितंबर 2024 में शुरू की गई व्यवस्था के तहत, काउंटिंग रूम में आने-जाने वाले सभी कर्मचारियों की सुरक्षा जांच की जाती थी।

हालांकि, 6 फरवरी 2025 को जारी एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) ने इस आवश्यकता को कम कर दिया, जिससे केवल नियमित अंतराल पर या रैंडम आधार पर जांच की अनुमति मिली।  जिन परिस्थितियों में नियम बदला गया, उनकी बारीकी से जांच की जानी चाहिए, खासकर इसलिए क्योंकि कथित तौर पर ये सीमित जांच भी नहीं की गईं।

इसमें कहा गया है कि पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा, जिन्होंने बैंक के साथ सितंबर 2024 की व्यवस्था और फरवरी 2025 की SOP दोनों को तैयार करते समय ट्रस्ट का प्रतिनिधित्व किया था, उनसे यह सुनिश्चित करने की उम्मीद की गई थी कि सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं। रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार निगरानी, नियमित समीक्षा या प्रभावी देखरेख के बहुत कम सबूत मिले

5. गिनती की प्रक्रिया में खामियां

दान के तीनों तरीकों (हुंडी, काउंटर, गर्भगृह) में कैश और कीमती सामान संभालने के तय नियमों का बड़े पैमाने पर उल्लंघन मिला। इसमें खराब डॉक्यूमेंटेशन, दान की गई चीज़ों का आपस में मिलना और कस्टडी की कमज़ोर चेन-ऑफ-कस्टडी कंट्रोल जैसी बातें शामिल थीं।

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