36 दिन बाद खत्म हुआ CJP का आंदोलन, सरकार से सहमति के बाद जंतर-मंतर खाली करने की अपील
पिछले 36 दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन आखिरकार समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार और CJP के बीच हुई अहम बैठक के बाद संगठन ने अपने आंदोलन को वापस लेने का ऐलान कर दिया। इसके साथ ही जंतर-मंतर पर मौजूद सभी छात्रों और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक अपने-अपने घर लौटने की अपील की गई।
दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई बैठक में केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल हुए, जबकि CJP की ओर से सौरभ दास और आशुतोष रांका ने बातचीत की। बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP ने घोषणा की कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति जताई है, जिसके बाद आंदोलन समाप्त करने का फैसला लिया गया है।
CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में सरकार के साथ तीन दौर की बातचीत हुई। संगठन का दावा है कि उनकी प्रमुख मांगों पर सहमति बनी है। इनमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, आंदोलन से जुड़े छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया तथा NEET से प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि चार सप्ताह बाद CJP का प्रतिनिधिमंडल एक बार फिर केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात करेगा, जिसमें शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और भविष्य में पेपर लीक रोकने के लिए ठोस कदमों पर चर्चा होगी।
उधर, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने बताया कि आंदोलनकारियों ने सरकार को एक लिखित मांग-पत्र सौंपा था। सरकार ने नियमों के तहत अधिकतम संभव मुआवजा देने, विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों पर कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप विचार करने और शिक्षा सुधारों से जुड़े सुझावों का अध्ययन करने पर सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच आगे भी संवाद जारी रहेगा ताकि शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जा सके।
इस घोषणा के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों में खुशी का माहौल देखने को मिला। प्रदर्शनकारियों ने एक-दूसरे को बधाई दी, छात्र एकता जिंदाबाद के नारे लगाए और राष्ट्रगान गाया। इस दौरान NEET पेपर लीक विवाद के बाद जान गंवाने वाले छात्रों को श्रद्धांजलि देने के लिए दो मिनट का मौन भी रखा गया।
36 दिनों तक चले इस आंदोलन ने देश भर में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस छेड़ी। अब आंदोलन समाप्त होने के बाद सभी की नजर इस बात पर होगी कि सरकार बातचीत के दौरान किए गए आश्वासनों को किस तरह और कितनी तेजी से जमीन पर लागू करती है।
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