नई दिल्ली। संसद एवं अन्य विधायिकाओं के कामकाज और कानून बनाने के तरीकों पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर कुछ नेताओं ने चिंता व्यक्त की।
उन्होंने रविवार को राज्यसभा के सभापति एम. वेंकैया नायडू से कहा कि किसी भी सदस्य या पार्टी और अन्य संवैधानिक एजेंसियों द्वारा कामकाज के मानकों के किसी भी उल्लंघन की स्थिति में पीठासीन अधिकारियों को कार्रवाई करनी चाहिए और अन्य संवैधानिक निकायों को उन पर प्रतिकूल टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए।
संसद के शीत सत्र से पहले नायडू के आवास पर बुलाई गई विभिन्न दलों के सदन के नेताओं की बैठक में यह मुद्दा उठाया गया।
जवाब में वेंकैया ने कहा, ‘मैं आपकी चिंता समझ सकता हूं, लेकिन ऐसी टिप्पणियों को विधायिकओं के कामकाज में लगातार व्यवधानों, अनियंत्रित व्यवहार और हिंसक कृत्यों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
उन्हें जवाब देने का सर्वश्रेष्ठ तरीका सदन की गरिमा और मर्यादा बरकरार रखते हुए विधायिकाओं का समुचित कामकाज सुनिश्चित करना है। ऐसी टिप्पणियों को लोगों का समर्थन इसलिए मिलता है क्योंकि वे ऐसा देखते हैं।’
बैठक में विभिन्न दलों के 40 नेताओं ने हिस्सा लिया। संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी जहां विधायी एजेंडे के बारे में जानकारी दी, वहीं नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य पार्टियों के नेताओं ने उन मुद्दों को उठाया जिन पर वे सत्र के दौरान चर्चा करना चाहते हैं।
कुछ नेताओं ने मानसून सत्र के दौरान कामकाज पर चिंता व्यक्त की जब लगातार व्यवधानों की वजह से 70 प्रतिशत समय बर्बाद हो गया था।
कई नेताओं ने जोर देकर कहा कि वे सदन के सुचारू संचालन के पक्ष में हैं और एक उत्पादक शीतकालीन सत्र का आह्वान किया। नायडू ने सरकार और विपक्ष से सदन के प्रभावी कामकाज को सक्षम करने के लिए नियमित रूप से एक-दूसरे से बात करने का आग्रह किया। उन्होंने सभी वर्गों से एक उत्पादक शीतकालीन सत्र सुनिश्चित करने में सहयोग करने की अपील की।
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