क्या मोदी सरकार ने देश का सोना बेच दिया?
क्या भारत के खजाने से 83 टन सोना कम हो गया है? क्या रुपये को संभालने के लिए सरकार को अपना सोना बेचना पड़ा? एक विदेशी रिपोर्ट ने ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनकी चर्चा पूरे देश में हो रही है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि मोदी सरकार ने करीब 12 अरब डॉलर का सोना बेचकर डॉलर खरीदे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा रुपये पर बढ़ते दबाव की वजह से यह कदम उठाया गया। दावे में कहा गया कि कमजोर रुपये और बढ़ते आयात बिल से निपटने के लिए सरकार ने अपने गोल्ड रिजर्व का इस्तेमाल किया। अगर यह दावा सही होता, तो देश के स्वर्ण भंडार में करीब 83 टन की कमी आ सकती थी।
लेकिन कहानी यहीं पलट जाती है…
सरकार की फैक्ट-चेक एजेंसी PIB ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह गलत बताया है। PIB का कहना है कि सरकार द्वारा सोना बेचने का दावा भ्रामक है और इसके समर्थन में कोई आधिकारिक जानकारी मौजूद नहीं है। यानी एक तरफ विदेशी रिपोर्ट का बड़ा दावा है, तो दूसरी तरफ सरकार का साफ इनकार।
ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सच क्या है? क्या यह केवल एक आर्थिक अनुमान था, या फिर बिना ठोस तथ्यों के फैलाई गई खबर?
फिलहाल, सरकार की ओर से सोना बेचने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। इसलिए देश का सोना बिकने जैसी बातों पर भरोसा करने से पहले तथ्यों और आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। कुल मिलाकर, सोना फिलहाल चर्चा का विषय बना हुआ है, लेकिन सच और दावों के बीच की लड़ाई अभी जारी है। और इसी बहस ने सरकार के खजाने को सुर्खियों में ला दिया है।
मोदी सरकार के पास करीब 880 टन सोना है, जिसे देश की आर्थिक ताकत का एक महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। जब किसी देश को पैसों या डॉलर की आवश्यकता होती है, तब वह अपना सोना बेच सकता है या उसे गिरवी रख सकता है। भारत ने वर्ष 1991 के आर्थिक संकट के दौरान ऐसा किया था।
हालांकि, RBI का कहना है कि उसने कोई सोना नहीं बेचा है और देश का स्वर्ण भंडार पूरी तरह सुरक्षित है।
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