पत्र में 10 मांगें राखी गयीं, लिखा आदिवासियों को दया नहीं अधिकार चाहिए
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Jeetu Patwari wrote a letter on the Honorable’s Madhya Pradesh visit- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मध्य प्रदेश दौरे को
लेकर प्रदेश की राजनीति में आदिवासी मुद्दों को लेकर नया सियासी मोड़ आ गया है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर प्रदेश के आदिवासी समाज की समस्याओं,
संवैधानिक अधिकारों और विकास से जुड़े मुद्दों पर हस्तक्षेप की मांग की है।
पत्र में जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए कहा कि देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के
रूप में उनका जीवन संघर्ष करोड़ों आदिवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
उन्होंने राष्ट्रपति का ध्यान मध्य प्रदेश के आदिवासी अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पलायन, कुपोषण, वनाधिकार और
सामाजिक सुरक्षा जैसी गंभीर समस्याओं की ओर आकर्षित किया।
राष्ट्रपति का MP दौरा -जीतू पटवारी ने पत्र लिख आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन और अधिकारों का उठाया मुद्दा
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने लिखा कि मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा आदिवासी आबादी वाला राज्य है,
लेकिन झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी, खरगोन, मंडला, डिंडौरी, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर
जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्रों में विकास की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है।
पत्र में आदिवासी समाज की कम साक्षरता दर, शिक्षकों की कमी,
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली, कुपोषण, टीबी, बेरोजगारी और
पलायन जैसी समस्याओं का विस्तार से उल्लेख किया गया है।
साथ ही जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों,
वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और पेसा कानून को लागू करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।
जीतू पटवारी ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि वे अपने प्रवास के दौरान आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से संवाद करें
तथा राज्य सरकार को आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए आवश्यक निर्देश दें।
कांग्रेस ने पत्र के माध्यम से 10 प्रमुख मांगें भी रखी हैं, जिनमें विशेष शिक्षा एवं स्वास्थ्य योजना, रिक्त पदों पर भर्ती, वनाधिकार कानून का पूर्ण पालन,
रोजगार मिशन, कुपोषण उन्मूलन अभियान, आदिवासी महिलाओं की सुरक्षा, टीएसपी फंड के पारदर्शी उपयोग और पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन जैसी मांगें शामिल हैं।
पत्र के अंत में पटवारी ने कहा कि आदिवासी समाज को दया नहीं बल्कि अधिकार, आश्वासन नहीं बल्कि अवसर और प्रतीकात्मक सम्मान
नहीं बल्कि विकास में वास्तविक भागीदारी की आवश्यकता है। राष्ट्रपति के दौरे के बीच कांग्रेस का यह पत्र प्रदेश की राजनीति में आदिवासी मुद्दों को लेकर नई बहस छेड़ सकता है।
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