इंदौर कांग्रेस में युग परिवर्तन….संजय एक ‘योद्धा ‘

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संजय शुक्ला को ‘बच्चा’ कहना एक हताशा थी और ‘कबूतर’ कहकर शुक्ला की उड़ान की स्वीकारोक्ति। परिणाम कुछ भी रहे पर इंदौर कांग्रेस से एक युवा नेता प्रदेश में ‘टेक ऑफ ‘ को तैयार है। वहीँ पंकज संघवी, सत्यनारायण पटेल जैसे नेताओं के ‘हेलीकाप्टर’ अब पार्किंग में खड़े रहेंगे ये भी तय है

पंकज मुकाती (संपादक पॉलिटिक्सवाला )

इंदौर महापौर का फैसला रविवार को होगा। मुकाबला भाजपा के वकील और कांग्रेस के जननेता के बीच रहा। एक तरफ भाजपा के नेताओं और सरकार की पैरवी करने वाले पुष्यमित्र भार्गव तो दूसरी तरफ जनता को हक़, न्याय दिलाने के लिए जमीन पर संघर्ष करने वाले संजय शुक्ला। चुनाव को शुक्ला के धनबल,बाहुबल से भी जोड़ा गया। पर सब जानते हैं, धन और बाहुबल सत्ता से ज्यादा किसी के पास नहीं होता। चुनाव कोई भी जीते पर शुक्ला ने जिस ढंग से चुनाव
लड़ा उसने इंदौर कांग्रेस को ज़िंदा कर दिया। शुक्ला भाजपा के गढ़ में योद्धा बनकर उभरे।

संजय शुक्ला के कारण ही करीब 50 सीटों पर कांग्रेस के पार्षद प्रत्याशी भी किला लड़ाने का साहस दिखा सके। कांग्रेस महापौर चुनाव में पूरे 25 साल बादमैदान में मजबूत दिख रही है। कांग्रेस में सेबोटाज और गुटबाजी ख़त्म नहीं हो सकती ये सब जानते हैं। बावजूद इसके संजय को जनता के बीच मजबूत देखकर सभी अपने-अपने विधानसभा में सक्रिय हो गए। आखिर वर्चस्व तो सबको बचाना है।

इस चुनाव ने इंदौर कांग्रेस में एक नए नेता और नए युग की दस्तक दी है। शुक्ला ने जीतू पटवारी, विशाल पटेल, अश्विन जोशी से तो संतुलन बनाया ही, युवा पीढ़ी के पिंटू जोशी, चिंटू चौकसे, टंटू शर्मा, अनूप शुक्ला जैसे नेताओं को भी अपने से जोड़ा। इसके अलावा वक्त के साथ निस्तेज और निष्क्रिय हो चुके कृपाशंकर शुक्ला, शोभा ओझा, सत्यनारायण पटेल जैसे नेताओं की भी अनदेखी नहीं की। बाणगंगा में यादव परिवार और गोलू अग्निहोत्री पर भी वे प्रेम बरसाते रहे।

विनय बाकलीवाल (शहर अध्यक्ष ) जो प्रमोद टंडन पार्ट-2 ही हैं। बाकलीवाल एक वार्ड में भी वोट दिलवाने की ताकत नहीं रखते। शुक्ला ने अपने खुद के संगठन पर चुनाव लड़ा। पर वे संगठन के अध्यक्ष को सम्मान देना नहीं भूले। बाकलीवाल पूरे वक्त साथ दिखे या कहिये रखे गए।

सही मायनों में इंदौर के कांग्रेसी संगठन को शुक्ला ने वापस ज़िंदा किया है। पार्षद प्रत्याशी राजू भदौरिया और चंदू शिंदे विवाद में जिस तरह से शुक्ला ने पुलिस से लेकर प्रशासन तक और भाजपा के गढ़ दो नंबर विधानसभा में घुसकर जिस तरह से मोर्चा संभाला वैसा महेश जोशी के दौर के बाद पहली बार किसी कांग्रेसी ने साहस दिखाया है।

इंदौर कांग्रेस में टिकट का आधार पैसा रहा है,ये हम पंकज संघवी और सत्यनारायण पटेल के टिकट में देख चुके हैं। शुक्ला को जब टिकट मिला तब इसे भी धनबल का टिकट ही समझा गया। पर अपनी मेहनत से और रणनीति से शुक्ला ने साबित कर दिया कि वे जनता के नेता हैं। कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, दिग्विजयसिंह, विजयलक्ष्मी साधो, सुरेश पचौरी, सज्जन सिंह वर्मा जैसे नेताओं का एक सुर में शुक्ला के साथ खड़े होना भी उनकी ताकत को बताता है।

संजय शुक्ला को ‘बच्चा’ कहना एक हताशा थी और ‘कबूतर’ कहकर शुक्ला की उड़ान की स्वीकारोक्ति। परिणाम कुछ भी रहे पर इंदौर कांग्रेस से एक युवा नेता प्रदेश में ‘टेक ऑफ ‘ को तैयार है। वहीँ पंकज संघवी, सत्यनारायण पटेल जैसे नेताओं के हेलीकाप्टर अब पार्किंग में खड़े रहेंगे ये भी तय है।

 

 

 


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