उज्जैन। उज्जैन में आगामी सिंहस्थ कुंभ को लेकर कई कार्य शुरू हो चुके हैं। प्रयागराज कुंभ से सबक लेते हुए उज्जैन में भी क्राउड मैनेजमेंट पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ-साथ प्रयागराज कुंभ में पहली बार शाही शब्द को हटाकर अमृत स्नान का उपयोग किया गया। इसको लेकर उज्जैन महाकाल मंदिर के पुजारी ने उज्जैन कुंभ के दौरान शाही के साथ-साथ छावनी पेशवाई जैसे अन्य शब्दों को भी कुंभ से हटाने की मांग की है।
महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश शर्मा ने कहा कि भगवान महाकाल की निकलने वाली शाही सवारी का नाम बदला गया था उसी तरह से प्रयागराज कुम्भ में भी शाही स्नान का नाम बदलकर अमृत स्नान किया। अब हमारी मांग है कि छावनी जैसे अन्य नाम अंग्रेजों के शासन काल की याद दिलाते हैं, यह गुलामी का प्रतीक है। इसी तरह पेशवाई मराठा कालीन नाम है।
2024 के सावन भादौ माह में निकलने वाली शाही और अंतिम सवारी के नाम में शाही शब्द को लेकर भी मांग उठी थी कि शाही शब्द मुगल कालीन है इसे हटाया जाए। जिसके तुरंत बाद मध्य प्रदेश सरकार की और से जारी हुए प्रेस नोट में अंतिम सवारी को राजसी सवारी का नाम दे दिया गया। जिसके बाद अंतिम सवारी में सभी दूर उद्घोषणा में भगवान महाकाल की अंतिम राजसी सवारी ही कहा गया था।
You may also like
-
संविधान दिखाते नागरिकों को, मनुस्मृति दिखाता सुप्रीम कोर्ट!
-
परिवारवाद पर सवालों के घेरे में नीतीश कुमार, बेटे निशांत कुमार की एंट्री से बदला राजनीतिक नैरेटिव
-
किसानों को ढाल बनाकर अपना उल्लू सीधा करने का कांग्रेस का प्लान ‘चक्काजाम’
-
भाजपा को बंगाल में नीतीश चाहिए!
-
बंगाल चुनाव में पार्टियां तोहमत लगाने के साथ-साथ, मोदी से कुछ सीख भी सकती थीं!
