तमिलनाडु में ‘थलापति’ का उदय! क्या विजय बनने जा रहे हैं नए किंगमेकर, कांग्रेस ने भी बदला रुख?
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तमिलनाडु की राजनीति में इस वक्त सबसे ज्यादा चर्चा अगर किसी नाम की हो रही है, तो वह है अभिनेता से नेता बने थलापति विजय।
उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम यानी TVK ने विधानसभा चुनाव में ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने न सिर्फ राज्य की राजनीति को हिला दिया है बल्कि देशभर के राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है।
दो साल पहले बनी पार्टी का सीधे सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं माना जा रहा।
चुनाव नतीजों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विजय तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं? और अगर हां, तो बहुमत का जादुई आंकड़ा वह कैसे जुटाएंगे? क्योंकि सीटों के गणित में अभी भी कुछ कमी साफ दिखाई दे रही है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि विजय ने चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद अपनी पार्टी की कोर कमेटी के साथ लंबी बैठक की। इस बैठक में सरकार गठन, सहयोगी दलों से बातचीत और आगे की रणनीति पर मंथन हुआ। सूत्रों के मुताबिक, विजय ने अपने करीबी सलाहकार एसए चंद्र को अलग-अलग दलों से संपर्क साधने की जिम्मेदारी दी है।
सबसे बड़ा राजनीतिक झटका कांग्रेस के रुख ने दिया है। खबरें हैं कि कांग्रेस अब DMK से दूरी बनाकर विजय की पार्टी TVK के साथ खड़ी नजर आ रही है। तमिलनाडु कांग्रेस के कुछ नेताओं का कहना है कि हाईकमान पहले से ही विजय के साथ गठबंधन को लेकर सकारात्मक था। यही वजह है कि अब समर्थन की जमीन तैयार होती दिखाई दे रही है।
दरअसल, तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही है। लेकिन इस चुनाव में पहली बार ऐसा लगा कि जनता किसी नए विकल्प की तलाश में थी। विजय की लोकप्रियता और उनकी साफ-सुथरी छवि ने युवाओं और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं को काफी प्रभावित किया।
TVK ने चुनाव में करीब 35 प्रतिशत वोट हासिल किए हैं। यह आंकड़ा बताता है कि जनता ने सिर्फ फिल्मों के सुपरस्टार को नहीं, बल्कि एक राजनीतिक विकल्प को भी स्वीकार किया है। वरिष्ठ पत्रकार डी. सुरेश कुमार का कहना है कि विजय की पार्टी ने दोनों बड़े गठबंधनों को चुनौती दी है। ऐसे में कोई भी दल उन्हें सत्ता से बाहर रखने की कोशिश करेगा, तो जनता में इसका गलत संदेश जा सकता है।
यही वजह है कि अब तमिलनाडु की राजनीति में नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के पांच विधायकों का समर्थन लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि इसके बावजूद विजय बहुमत के आंकड़े से कुछ सीटें दूर रहेंगे।
तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। TVK ने 108 सीटें जीती हैं, लेकिन विजय खुद दो सीटों से चुनाव जीत गए हैं। नियम के अनुसार उन्हें एक सीट छोड़नी होगी। यानी पार्टी के पास प्रभावी रूप से 107 विधायक ही बचेंगे।
अगर कांग्रेस के पांच विधायक समर्थन देते हैं, तो यह संख्या 112 तक पहुंचेगी। इसके बाद भी बहुमत के लिए छह विधायकों की जरूरत होगी। ऐसे में खबर है कि विजय की पार्टी VCK, CPI और CPM जैसी पार्टियों से संपर्क में है। इन दलों के पास दो-दो विधायक हैं और माना जा रहा है कि इनमें से कुछ दल समर्थन दे सकते हैं।
राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि गठबंधन सरकार का खाका भी लगभग तैयार हो चुका है। कांग्रेस को दो मंत्री पद दिए जा सकते हैं, जबकि छोटे सहयोगी दलों को तीन से चार मंत्रालय मिलने की संभावना जताई जा रही है। विजय भी गठबंधन सरकार चलाने के लिए तैयार बताए जा रहे हैं।
हालांकि, सरकार गठन का रास्ता अभी पूरी तरह आसान नहीं है। सबसे बड़ी चुनौती फ्लोर टेस्ट यानी विश्वास मत होगी। सदन में बहुमत साबित करना हर नई सरकार के लिए जरूरी होता है। लेकिन राजनीति में कई बार आंकड़ों का खेल अलग तरीके से भी काम करता है।
विश्लेषकों का मानना है कि अगर फ्लोर टेस्ट के दौरान कुछ विपक्षी विधायक सदन से बाहर रहते हैं या मतदान में हिस्सा नहीं लेते, तो बहुमत का आंकड़ा कम हो सकता है। उदाहरण के तौर पर अगर 30 विधायक सदन में मौजूद नहीं रहते, तो प्रभावी संख्या घटकर 204 रह जाएगी। ऐसी स्थिति में सरकार बचाने के लिए सिर्फ 103 विधायकों की जरूरत होगी।
यानी मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से भी विजय सरकार बनाने की स्थिति में आ सकते हैं। हालांकि यह पूरी तरह राजनीतिक परिस्थितियों और विपक्षी दलों की रणनीति पर निर्भर करेगा। अगर सभी दल अपने विधायकों को सदन में मौजूद रहने का व्हिप जारी करते हैं, तो विजय के लिए चुनौती बढ़ सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच जनता की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। चुनाव नतीजों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मतदाता कब और किसके पक्ष में फैसला दे दें, इसका अनुमान लगाना आसान नहीं होता।
एक पुरानी कहावत है — “भीड़ का मन और मौसम का रंग, पल में बदल जाता है।” आज की राजनीति पर यह बात बिल्कुल फिट बैठती है। तमिलनाडु में भी यही देखने को मिला, जहां वर्षों पुरानी राजनीतिक धारणाएं अचानक बदलती नजर आईं।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन का एक मशहूर कथन भी इन चुनावों पर सटीक बैठता है — “You can’t fool all the people all the time.” यानी जनता को हमेशा भ्रमित नहीं किया जा सकता।
शायद यही कारण है कि तमिलनाडु की जनता ने इस बार पारंपरिक राजनीति से हटकर एक नए चेहरे पर भरोसा जताया। विजय की सभाओं में उमड़ी भीड़, युवाओं का उत्साह और सोशल मीडिया पर बढ़ती लोकप्रियता पहले ही संकेत दे रही थी कि इस बार चुनाव में कुछ बड़ा होने वाला है। लेकिन शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक नई पार्टी सीधे सत्ता के दरवाजे तक पहुंच जाएगी।
अब नजरें 7 मई पर टिकी हैं। TVK के चीफ स्पोक्सपर्सन फेलिक्स गेराल्ड का दावा है कि विजय उसी दिन मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। उन्होंने कहा है कि सरकार बनाने के लिए सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है।
फिलहाल तमिलनाडु की राजनीति बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। एक तरफ पारंपरिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ विजय अपने राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी परीक्षा का सामना कर रहे हैं।
अगर विजय बहुमत जुटाने में सफल हो जाते हैं, तो यह सिर्फ तमिलनाडु ही नहीं बल्कि देश की राजनीति के लिए भी बड़ा संदेश होगा। यह दिखाएगा कि जनता अब नए विकल्पों को मौका देने के लिए तैयार है और राजनीति में स्थापित समीकरण कभी भी बदल सकते हैं।
आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि थलापति विजय सिर्फ चुनावी स्टार बनकर रह जाएंगे या सच में तमिलनाडु की राजनीति के नए ‘किंगमेकर’ साबित होंगे।
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