मध्य प्रदेश में कांग्रेस का ‘महा-चक्काजाम’, किसानों के मुद्दे पर सियासत तेज
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मध्य प्रदेश की सड़कें आज सियासत के अखाड़े में तब्दील हो गईं। किसानों के मुद्दे पर हुंकार भरते हुए कांग्रेस ने आगरा-मुंबई नेशनल हाईवे (NH-52) पर ‘महा-चक्काजाम’ कर दिया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में हुए इस आंदोलन ने इंदौर से लेकर गुना तक सरकार की धड़कनें बढ़ा दीं। हाईवे के सात अलग-अलग पॉइंट्स पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ऐसा घेरा डाला कि कहीं एंबुलेंस की सायरन गूंजती रही, तो कहीं शादी की बारातें घंटों जाम में फंसी रहीं।
इंदौर बायपास पर डेढ़ किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें देखने को मिलीं। भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच जीतू पटवारी ने साफ शब्दों में कहा कि, “हम किसान के बेटे हैं, न जेल से डरेंगे और न ही पीछे हटेंगे।”
मध्य प्रदेश में बदलते सियासी हालात के बीच कांग्रेस अब अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव करती नजर आ रही है। महिलाओं के बड़े वोट बैंक के सरकार की ओर झुकाव के बाद पार्टी ने अब अपना पूरा फोकस किसानों पर केंद्रित कर दिया है।
कांग्रेस का मानना है कि मौजूदा समय में प्रदेश का अन्नदाता सबसे ज्यादा परेशान है और यदि किसानों के मुद्दों को प्रदेशव्यापी आंदोलन का रूप दिया जाए, तो इसका सीधा राजनीतिक लाभ भी मिल सकता है।
इसी रणनीति के तहत कांग्रेस और किसान संगठनों ने 7 मई को मुंबई–आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम किया।
यह आंदोलन किसानों की फसल खरीदी, मुआवजा, मंडी व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश माना जा रहा है।
हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या इस तरह किसी नेशनल हाईवे को जाम करना सही है? क्या कांग्रेस इस बात से बेखबर है कि इस चक्काजाम से आम लोगों को कितनी परेशानी का सामना करना पड़ा और अब भी पड़ रहा है?
गांधी की विचारधारा को मानने वाली कांग्रेस पर अब सवाल उठ रहे हैं। Mahatma Gandhi हमेशा “सत्याग्रह” और “अहिंसा” के पक्षधर रहे। उनका मानना था कि ऐसा विरोध सही है जो शांतिपूर्ण हो, हिंसा न फैलाए और आम लोगों को अनावश्यक पीड़ा न दे।
गांधीजी ने The Story of My Experiments with Truth और Hind Swaraj जैसी रचनाओं में अहिंसा और जनहित को सर्वोपरि बताया है।
चक्काजाम से पहले जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर किसानों के साथ अत्याचार का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि 43 डिग्री की भीषण गर्मी में किसान अपनी गेहूं की फसल लेकर सड़कों के किनारे खड़े रहने को मजबूर हैं, क्योंकि सरकार के पास न तो खरीदी की सही नीति है और न ही सही नीयत।
वहीं आंदोलन के दौरान एक और बात चर्चा में रही। आंदोलन किसानों की समस्याओं को लेकर था, लेकिन कई जगहों पर “जिंदाबाद” के नारे केवल जीतू पटवारी के समर्थन में सुनाई दिए। “जय किसान” और “जय जवान” जैसे नारों की कमी भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रही।
बताया जा रहा है कि इस चक्काजाम का असर प्रदेश के करीब 17 जिलों में देखने को मिला। अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग तरीके से सड़कें रोकी गईं। वहीं कांग्रेस नेता जयवर्धन सिंह ने भी गुना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद किया।
अब विपक्ष और आम लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या यह आंदोलन वास्तव में किसानों के हित में था या फिर कांग्रेस किसानों की आड़ में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस का यह आंदोलन किसानों के बीच कितनी पकड़ बना पाता है और जनता इसे किस नजरिए से देखती है।