संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन, एलपीजी संकट और बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार से जवाब और राहत की मांग रखी..
देश में एलपीजी गैस सिलेंडर की उपलब्धता और कीमतों को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। गुरुवार, 12 मार्च को संसद परिसर में विपक्षी दलों के सांसदों ने इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष का आरोप है कि देश में गैस सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों से आम जनता, किसान और छोटे व्यवसायी गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर सांसदों ने संसद परिसर में नारेबाजी की और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
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संसद परिसर मेंहुए प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शन के दौरान “नरेंदर सरेंडर”, “नरेंदर गायब, सिलेंडर भी गायब” जैसे नारे गूँजे। कई सांसद हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर पहुंचे थे, जिन पर गैस सिलेंडर की कीमतों और आपूर्ति संकट को लेकर सरकार की आलोचना की गई थी। इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी शामिल हुए। उनके साथ वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई अन्य विपक्षी नेता मौजूद थे।
राहुल गांधी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार जनता की चिंता को गंभीरता से नहीं ले रही है। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री बार-बार यह दावा कर रहे हैं कि स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन जमीनी हालात इसके उलट दिखाई दे रहे हैं। राहुल गांधी ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार संकट की वास्तविक स्थिति को छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि अगर सब कुछ सामान्य है तो देश के कई हिस्सों में लोगों को गैस सिलेंडर के लिए लंबा इंतजार क्यों करना पड़ रहा है।
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कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सरकार पर हमला बोला। उनका कहना है कि देश के कई राज्यों में एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित हो रही है और इसका सबसे ज्यादा असर किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ रहा है। उनके अनुसार खेती से जुड़े कई काम ईंधन पर निर्भर होते हैं और गैस व अन्य ऊर्जा स्रोतों की कमी से कृषि गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। खड़गे ने दावा किया कि कई जगहों पर घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की रिफिल के लिए तीन से चार सप्ताह तक इंतजार करना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि गैस वितरण केंद्रों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं और कुछ स्थानों पर कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। उनका आरोप है कि गैस की आपूर्ति कम होने से छोटे होटल, ढाबे और रेस्तरां भी प्रभावित हो रहे हैं। कई छोटे कारोबारियों के लिए गैस सिलेंडर जरूरी ईंधन है और आपूर्ति बाधित होने से उनका व्यवसाय प्रभावित हो रहा है।
खड़गे ने इस पूरे संकट को अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों से भी जोड़ा। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल और गैस के जहाजों पर खतरा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के ऊर्जा व्यापार का एक महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है। अगर यहां किसी प्रकार की रुकावट आती है तो इसका असर तेल, गैस और एलपीजी की आपूर्ति पर पड़ सकता है।
कुछ जुड़ी हुई बातें-
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एलपीजी संकट पर संसद में विपक्ष प्रदर्शन
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गैस सिलेंडर की कमी पर हंगामा
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एलपीजी मुद्दे पर सरकार घिरी संसद में
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गैस आपूर्ति संकट पर विपक्ष का विरोध
विपक्ष का कहना है कि ऊर्जा आपूर्ति में संभावित बाधा का असर सिर्फ घरेलू गैस तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे कई औद्योगिक क्षेत्रों पर भी दबाव बढ़ सकता है। उनके अनुसार कच्चे माल की लागत बढ़ने से दवाइयों, कपड़ा उद्योग, स्टील, सिरेमिक, ग्लास, एफएमसीजी और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों पर असर पड़ने की आशंका है। कुछ विपक्षी नेताओं ने यह भी दावा किया कि ऊर्जा लागत बढ़ने से कई उद्योगों की उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हो रही है।
संसद के अंदर भी इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने जोरदार विरोध दर्ज कराया। लोकसभा में विपक्षी सांसदों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। वहीं राज्यसभा में भी विपक्षी दलों ने विरोध जताते हुए वॉकआउट किया। विपक्ष की मांग है कि एलपीजी संकट और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर संसद में विस्तृत चर्चा कराई जाए ताकि सरकार अपनी स्थिति स्पष्ट कर सके।
विपक्षी सांसदों ने यह भी कहा कि सरकार को एलपीजी की कीमतों में राहत देने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए। कुछ नेताओं ने पेट्रोलियम मंत्री से इस्तीफे की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि बढ़ती कीमतें और आपूर्ति की अनिश्चितता से आम लोगों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है।
हालांकि सरकार और उसके सहयोगी दल विपक्ष के आरोपों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया मुद्दा बता रहे हैं। सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी की आपूर्ति सामान्य है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर नजर रखी जा रही है और ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
सरकार के कुछ सहयोगी दलों के नेताओं का कहना है कि भारत पहले भी कई वैश्विक संकटों से सफलतापूर्वक निपट चुका है। उनका तर्क है कि कोविड महामारी के दौरान भी देश ने ऊर्जा और जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति को बनाए रखा था और इस बार भी सरकार स्थिति को संभालने में सक्षम है।
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बताया जा रहा है कि सरकार ने घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए गैस सिलेंडर की रिफिल बुकिंग के बीच न्यूनतम समय बढ़ाने जैसे कदम भी उठाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि गैस की उपलब्धता अधिक से अधिक उपभोक्ताओं तक पहुंच सके।
फिलहाल संसद का बजट सत्र जारी है और एलपीजी संकट का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है। विपक्ष सरकार से पारदर्शिता और राहत की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
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