पंकज मुकाती
#Politicswalareport
मूर्ख ज्यादा मारक है या बालक बुद्धि, ये सवाल एक महाराज के दरबार में घूम रहा है। इसे समझने के लिए आपको महल की एक कहानी से गुजरना होगा।
मध्यप्रदेश में कुछ साल पहले तक एक महाराज रहे। उनका अपना दरबार रहा। वे राजनीति में उतरे तो भी श्रीमंत और महाराज के तमगे लिए घूमते रहे। कांग्रेस ने उनकी इस महाराजा वाली पदवी को खूब नवाजा।
उनके दरबारियों को कभी कांग्रेस ने कुछ नहीं कहा क्योंकि वे महाराज के दरबारी रहे, उनके
फैसले लेने के सर्वाधिकार महाराज के पास सुरक्षित रहे।
फिर महाराज के दरबार में सेंध लगी वे अपने ही एक दरबारी से चुनाव हार गए। बिना गद्दी के बेचैन हुए। राजयसभा के लिए देश की सबसे बड़ी पार्टी
में जा पहुंचे। राज्यसभा भी मिली। धूमधाम से ताजपोशी हुई। पर अब महाराज भाई साहब है और उनका दरबार अब जनता पार्टी हो गया है। उनके
उनके करीबियों को अब नोटिस भी मिल रहे हैं, और जिनसे वे हारे वे अब निगम के अध्यक्ष हैं।
अब महाराज के सामने एक नया और बड़ा सवाल है- मूर्ख और बालक बुद्धि का अंतर तलाशना। मूर्ख ज्यादा मारक है या बालक बुद्धि। दरअसल महाराज को गुना में चुनाव हराने वाले केपी यादव को गुना से लोकसभा की टिकट नहीं मिली।
वे भटकते रहे। अब भाजपा ने यादव को खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति
निगम का अध्यक्ष बना दिया। यानी अब यादव साहब भी मंत्री है।
जिस दरबारी से हारने के ग़म में भाजपा में गए। अब वही फिर सामने मंत्री बनकर है। राजधानी में महाराज के ख़ास कृष्णा घाडगे को ये रास नहीं आय।
वे मुखर हो गए। सोशल मीडिया पर केपी यादव को बिना नाम के लिख दिया बालक बुद्धि। अब ये महाराज की कांग्रेस तो है नहीं ये है भाई साहब वाली
भाजपा । तत्काल कृष्णा घाडगे को नोटिस थमा दिया गया।
सवाल ये भी कि कृष्णा घाडगे ने सिर्फ केपी यादव को बालक बुद्धि नहीं बताया है पूरे भाजपा के सिस्टम को घेरे में ले लिया है। संगठन, संघ और सत्ता
तीनों में मिलकर जिस नेता की निगम में ताजपोशी की उस पर सवाल उठाना एक तरफ से पूरे तंत्र की बुद्धि पर सवाल है। भाजपा वैसे भी जिसे वो
चुनती है उस पर सवाल बर्दाष्त नहीं करती है।
वैसे राजनीतिक रूप से कृष्णा भोपाल मध्य से विधायक के दावेदार भी हैं, जाहिर है बाकि दावेदारों ने भी इस मामले को ऊपर तक पहुंचाया। ताकि दौड़
थोड़ी कमजोर पड़े।
मामला ये है। केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक कृष्णा घाड़गे को भोपाल बीजेपी के शहर अध्यक्ष रवीन्द्र यती ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
कृष्णा ने गुना के पूर्व सांसद और नागरिक आपूर्ति निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष केपी यादव का नाम लिए बिना फेसबुक पर लिखा था- हर मंच पर…आज तो नहीं दिखे बालक बुद्धि नेता।
दरअसल नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करने के बाद अशोकनगर पहुंचे केपी यादव ने शनिवार को मंच पर कहा था- मैं दिल से मेरे शहरवासियों और वरिष्ठजनों, माताओं युवाओं का स्नेह प्यार इतनी ऊर्जा देता है कि मैं किसी से भी टकराने के लिए तैयार हूं।
इस अशोकनगर की बेहतरी के लिए जो बन सकेगा, कोई कसर आपका ये बेटा नहीं छोड़ेगाप्रदेश नेतृत्व ने मुझे यह जिम्मेदारी दी है तो अब दो साल तक तो कोई चाहे या न चाहे आपका ये बेटा हर मंच पर आपको दिखेगा।
केपी यादव ने कहा सिंधिया पर कटाक्ष किया कि हमारा अशोकनगर बहुत शांतिप्रिय और धार्मिक क्षेत्र है। यहां के लोग बडे़ प्यार से रहते हैं।
मेरा उन लोगों से आग्रह होगा, जो फूट डालकर राज करते हैं, जो आपस में लड़ाने की कोशिश करते हैं उनसे मेरा आग्रह है, इस क्षेत्र की बेहतरी के लिए काम करें, न कि लोगों को आपस में लड़ाने का काम करें।
केपी यादव ने कहा- मैं आज पूरे शहर की एक-एक गली में घूमा। मैंने देखा कि हर समाज का व्यक्ति अपने घर से बाहर आकर मुझे आशीर्वाद देने आया।
यह अलग बात है कि आज मंच पर कुछ लोग नहीं आए, लेकिन शहर के एक-एक व्यक्ति ने जो आशीर्वाद मुझे दिया है, वही मेरी ताकत है। आपका यह बेटा क्षेत्र की बेहतरी के लिए कभी कोई कसर नहीं छोड़ेगा।
फिलहाल केपी सबको बता रहे हैं मैं लौट आया हूँ। देखते हैं ये जोश वे कब तक रखते हैं। वैसे जुबान उनकी भी काबू में नहीं रहती सिंधिया समर्थक
पूर्व मंत्री महेंद्र सिसोदिया को वे मूर्ख कह चुके हैं।
अब मूर्ख, बालक बुद्धि के बाद भाषा का ये यद्ध कितने गुना नीचे जाता है देखते हैं।
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