आजकल आप बहुत व्यस्त रहते हैं, हमारी बैठकों में नहीं आ रहे…जब CM के सामने ही कैलाश विजयवर्गीय ने महापौर को घेरा!
*इंदौर की सियासत में बड़ा उलटफेर: मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के रिश्तों में आई खटास, ‘पाला बदलने’ की चर्चा तेज
*आजकल आप बहुत व्यस्त रहते हैं। हमारी बैठकों में नहीं आ रहे हैं। महापौर जी, आप भी इस बात पर ध्यान दें…
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का यह तंज इस बात की साफ तस्दीक कर रहा है कि इंदौर की राजनीति में अंदर ही अंदर कुछ बड़ा पक रहा है। एक वो दौर था जब मंत्री कै लाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव की खूब बनती थी, लेकिन शायद अब रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे। इंदौर में आयोजित ‘एक पेड़ मां के नाम’ कार्यक्रम में जिस अंदाज में कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने महापौर पर यह सीधा तंज कसा, वह दोनों के बीच बढ़ती दूरियों का साफ इशारा कर रहा है।
आखिर क्या है कैलाश विजयवर्गीय की नाराजगी का असली सबब?
चर्चा है कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की इस नाराजगी का सबसे बड़ा सबब है उनके द्वारा बुलाई गई समीक्षा बैठकों में महापौर पुष्यमित्र भार्गव का लगातार न आना। महापौर इन बैठकों से लगातार गैरमौजूद रहे। चौंकाने वाली बात यह है कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव की गिनती अब तक विजयवर्गीय खेमे में ही होती रही है, लेकिन महत्वपूर्ण बैठकों से उनकी यह दूरी साफ बता रही है कि इंदौर भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
इस भव्य समारोह में मंच पर जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि इस साल शहर में जलसंकट रहा और पेड़ लगाने से भूजल स्तर अच्छा रहता है, ठीक इसी के बाद उन्होंने सीधे महापौर को टारगेट किया। यह बात सुनने के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव भी थोड़ी देर के लिए असहज हो गए। गौर करने वाली बात यह है कि विजयवर्गीय ने जब मुख्यमंत्री के सामने यह बात कही, तब महापौर ठीक सीएम मोहन यादव के पास वाली कुर्सी पर ही बैठे हुए थे।
पोस्टरों से फोटो गायब और ‘मनीष मामा’ का विरोध
इंदौर की सियासत में यह तल्खी रातों-रात नहीं बढ़ी है, बल्कि इसके पीछे कई हालिया घटनाएं हैं। पिछले दिनों इंदौर में नगर निगम के कई बड़े आयोजनों में मुख्यमंत्री मोहन यादव शामिल हुए थे। कैलाश विजयवर्गीय खुद नगरीय प्रशासन विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं, लेकिन इन सरकारी आयोजनों के पोस्टरों और होर्डिंग्स से उनकी फोटो ही गायब नजर आई।
इस मुद्दे को लेकर मंत्री विजयवर्गीय के कट्टर समर्थक पार्षद मनीष मामा ने महापौर परिषद (MIC) की बैठक में भी कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसके अलावा, हाल ही में मंत्री विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक पत्र भी लिखा था, जिसमें उन्होंने इंदौर और पीथमपुर के साथ हो रही उपेक्षा को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की थीं।
पुराना दोस्ताना और बदली हुई राजनीतिक परिस्थितियां
अगर इतिहास में जाएं, तो महापौर चुनाव के समय जब तत्कालीन भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने एक बिल्कुल नए चेहरे के रूप में इंदौर महापौर पद के लिए पुष्यमित्र भार्गव का नाम आगे बढ़ाया था, तो उनके नाम पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तुरंत अपनी सहमति दी थी। इसके पीछे एक पारिवारिक जुड़ाव भी था; दरअसल, पुष्यमित्र के पिता और मंत्री विजयवर्गीय ने साथ में पढ़ाई की है और दोनों के बीच गहरी मित्रता है।
इतना ही नहीं, विधानसभा चुनाव के समय जब इंदौर-3 विधानसभा क्षेत्र से आकाश विजयवर्गीय का टिकट कटा था, तब भी मंत्री विजयवर्गीय ने पुष्यमित्र भार्गव का नाम ही इस सीट से उम्मीदवार के रूप में आगे सुझाया था। नगरीय प्रशासन विभाग होने के नाते विजयवर्गीय और महापौर के बीच अब तक बेहतरीन तालमेल रहा है, लेकिन अब मध्य प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं।
क्या महापौर ने बदल लिया है पाला?
इंदौर के नेताओं क का मानना है कि अब महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने अपना पाला बदल लिया है। सत्ता के नए समीकरणों के तहत अब महापौर की नजदीकी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से लगातार बढ़ने लगी है। वे हर बड़े मंच पर मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द नजर आते हैं और शायद यही बात कैलाश जी को सबसे ज्यादा खटक रही है कि जिस पौधे को उन्होंने खुद सींचा, वह अब दूसरे बागवान की छाया में फल-फूल रहा है। देखना दिलचस्प होगा कि इंदौर की इस नूराकुश्ती का अंजाम क्या होता है।
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