एंटी पेपर लीक कानून लागू, महामहीम ने किये हस्ताक्षर
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और नकल के मामलों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मंजूरी के बाद लोक परीक्षा संशोधन अधिनियम-2026 अब कानून बन चुका है।
संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद यह कानून पूरे देश में लागू हो गया है।
नए कानून का उद्देश्य सरकारी भर्ती परीक्षाओं और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली धांधली, पेपर लीक, तकनीकी सेंधमारी और संगठित नकल पर पूरी तरह रोक लगाना है। सरकार का दावा है कि इस कानून के लागू होने के बाद परीक्षा माफिया और अवैध नेटवर्क पर लगाम लगेगी।
संशोधित कानून के तहत अब पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ पहले से कहीं ज्यादा सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इसके अलावा, संगठित अपराध में शामिल गिरोहों, कोचिंग संस्थानों और सेवा प्रदाताओं के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह कानून संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा आयोजित परीक्षाओं पर लागू होगा। यानी अब केंद्र सरकार की लगभग सभी बड़ी भर्ती परीक्षाएं इस कानून के दायरे में आ गई हैं।
पिछले कुछ वर्षों में नीट, भर्ती परीक्षाओं और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों ने देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन को जन्म दिया था। छात्रों ने पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी।
Parliament passes a Bill that makes our examination system more robust! pic.twitter.com/OEvLKXoUaf
— Narendra Modi (@narendramodi) July 30, 2026
इसी दबाव के बीच सरकार यह संशोधन विधेयक लेकर आई थी।
नए कानून में जांच और सुनवाई की प्रक्रिया को भी तेज करने का प्रावधान किया गया है। पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाई जाएगी।
आरोप पत्र दाखिल होने के बाद विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों में रोजाना सुनवाई होगी और तीन महीने के भीतर मामले के निपटारे का प्रयास किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस कानून से युवाओं का प्रतियोगी परीक्षाओं पर भरोसा मजबूत होगा और मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को न्याय मिल सकेगा।
हालांकि, विपक्ष और कई छात्र संगठनों का मानना है कि केवल सख्त कानून बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
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