# Pankaj MUkati (Editor Politicswala)
INDORE .इंदौर में जहरीले पानी से 25 लोगों की ज़िंदगी चली गई। सिस्टम पर दोष मढ़कर सब अपने धंधे में लगे हुए है। मंत्रीजी साहस के साथ इलाके में डटे हुए हैं। उनके समर्थक सोशल मीडिया पर नंबर बढ़वाने के खेल में जुटे हुए हैं।
शहर के बुजुर्ग से युवा भाजपाई तक बड़ी बेशर्मी से लिख रहे हैं -हालात इतने बुरे नहीं है।मीडिया ने और विपक्ष ने जबरन हल्ला मचा रखा है।
अरे भाई, यदि सिर्फ एक गिलास साफ़ पानी के बदले 25 ज़िंदगियाँ चली जाए उससे ख़राब और बुरे हालात क्या होंगे। सोच पर तरस आता है। ऐसा लिखने वालों को एक बार सीधे टंकी का पानी पिलवाना चाहिए।
भागीरथपुरा में मरने वाले हिन्दू परिवारों से रहे हैं। उनके हिदुत्व का सम्मान कहीं नहीं हो रहा। कोई उनकी ज़िंदगी को दो लाख से तौल रहा तो कोई एक करोड़ के मुआवजे की मांग उठाकर उनका मजाक उड़ा रहा।
शहर में झंडे बैनर के साथ हिन्दू सम्मेलन हो रहे हैं। गली-गली में पंगत हो रही है। सौ साल का जश्न मनाने वाले और सत्ता के सिंहासन पर विराजे लोगों को ये भी सोचना चाहिए कि एक शतक और सत्ता के ढाई दशक के बाद भी हिन्दू क्यों पानी के लिए जान गंवा रहा है।
2047 के हिन्दुस्तान की तैयारी करने वालों को आज की इस गंदगी को पहले दूर करने के बार में सोचना चाहिए। सिर्फ बुलावे और नसीहत से न हिन्दुओं का भविष्य बदलेगा न हिंदुस्तान का।
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