IIT इंजीनियर से ‘बाबा’ बने अभिषेक मिश्रा पर गंभीर आरोप, मथुरा आश्रम से जुड़ा मामला बना चर्चा का विषय
मथुरा। आस्था और अध्यात्म के नाम पर लोगों का विश्वास जीतने वाले स्वयंभू बाबाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मथुरा में आश्रम संचालित करने वाले अभिषेक मिश्रा, जो खुद को आदिकर्ता नारायणदास बाबा के रूप में प्रस्तुत करता था, पर एक युवती ने बलात्कार, ब्लैकमेलिंग और शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है और पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।
बताया जा रहा है कि अभिषेक मिश्रा मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला है और उसने आईआईटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। इंजीनियर बनने के बाद उसने आध्यात्मिक गुरु और बाबा का रूप धारण कर लिया। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्रवचनों के माध्यम से उसने बड़ी संख्या में अनुयायी बनाए। उसके भक्तों में बड़ी संख्या पढ़े-लिखे लोगों और छात्र-छात्राओं की बताई जाती है, जो उसके प्रवचनों से प्रभावित होकर उससे जुड़ते गए।
इन्हीं अनुयायियों में छत्तीसगढ़ की एक नर्सिंग छात्रा भी शामिल थी। युवती का आरोप है कि मथुरा स्थित आश्रम में रहने के दौरान उसे दूध में नशीला पदार्थ मिलाकर दिया गया। जब सुबह उसकी आंख खुली तो उसे पता चला कि उसके साथ गलत काम हो चुका है। पीड़िता का आरोप है कि घटना के दौरान वीडियो भी बनाया गया और बाद में उसे वायरल करने की धमकी देकर पांच लाख रुपये की मांग की गई।
युवती ने अपने गृह राज्य लौटने के बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और आश्रम में छापेमारी की। पुलिस की कार्रवाई के दौरान आश्रम से दो अन्य युवतियां भी मिलीं। बताया जा रहा है कि वे नशे की लत का शिकार हो चुकी थीं। पुलिस ने मोबाइल फोन सहित कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। कई लोगों ने इस घटना की तुलना उन मामलों से की है जिनमें पहले धार्मिक या सामाजिक प्रभाव रखने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई थी। इसी संदर्भ में उत्तर प्रदेश में चर्चित रहे छांगुर बाबा प्रकरण का भी उल्लेख किया जा रहा है, जिसमें धर्मांतरण के आरोपों के बाद पुलिस और प्रशासन ने कठोर कदम उठाए थे।
अब बहस इस बात पर केंद्रित है कि क्या अभिषेक मिश्रा के मामले में भी उसी प्रकार की सख्त कार्रवाई देखने को मिलेगी। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह सवाल उठाया जा रहा है कि कानून का व्यवहार सभी के साथ समान होना चाहिए और कार्रवाई का आधार व्यक्ति की पहचान नहीं बल्कि उसके खिलाफ उपलब्ध तथ्य और सबूत होने चाहिए।
हालांकि इस पूरे मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया और जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल अभिषेक मिश्रा पुलिस कार्रवाई का सामना कर रहा है और जांच एजेंसियां मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।
यह घटना समाज के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी छोड़ती है। सोशल मीडिया, प्रवचनों या बाहरी व्यक्तित्व के आधार पर किसी व्यक्ति को आदर्श मान लेना कई बार खतरनाक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यक्ति का मूल्यांकन उसके वास्तविक व्यवहार, सामाजिक आचरण और मानवीय संवेदनाओं के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि केवल उसके उपदेशों या लोकप्रियता के आधार पर।
फिलहाल मथुरा से सामने आया यह मामला आस्था, विश्वास और जवाबदेही को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है। पुलिस जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई और तथ्य सामने आ सकते हैं।
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