ये है सीएम की जमीनी हकीकत
या
जमीन की खबर में भी खेल
या
जमीनी हकीकत का दूसरा पक्ष
या
एक्सप्रेस रिपोर्ट की जमीनी पड़ताल
या
इस बार EXPRESS चूक गया !

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव को लेकर जिस रिपोर्ट की पूरे दिन चर्चा रही। पहली नजर में ये बड़े घोटाले जैसा लगता है.

जब पूरी खबर को बारीकी से पढ़ते हैं इसमें घोटाले का या भ्र्ष्टाचार का कोई सवाल तक नहीं दिखता। जिस खबर को इन्वेस्टीगेशन कहकर परोसा गया
उसमे कहीं भी मुख्यमंत्री पर घोटाले या धोखे जैसे कोई बात नहीं कही गई है। यानी ये रिपोर्ट संभावनाओं /आशंकाओं  (यदि ऐसा हुआ तो ) पर गढ़ी हुई है।  इसका आधार कमजोर है। इस रिपोर्ट को इतने घुमावदार तरीके से गढ़ा गया है कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री बनते ही मोहन यादव और उनके परिवार ने सिर्फ एक ही काम किया जमीनों की खरीदी।
इस खबर को पढ़कर ये भी लगने लगता है  कि मुख्यमंत्री बनते ही कुनबे ने रियल स्टेट की कंपनियां खड़ी कर ली। सारे  काम छोड़कर पूरा कुनबा बस जमीन ही खरीद रहा है। रिपोर्ट में दूसरा सवाल ये है कि मुख्यमंत्री के कुनबे ने जो भी जमीनें खरीदीं उनसे हाईवे निकल रहे या दूसरे प्रोजेक्ट आ रहे। हकीकत ये है कि उज्जैन में अगले साल सिंहस्थ होना है इसलिए  शहर और उसके आसपास के 50  किलोमीटर तक के रेडियस में तेजी से निर्माण कार्य  चल रहा है। जाहिर सी बात है अकेले  यादव कुनबे को ही  नहीं जमीन से जुड़े सभी निवेशकों को इससे लाभ हो ही रहा होगा।
यदि सीएम के परिवार के पास 300 एकड़ से ज्यादा जमीन है तो उज्जैन में दूसरे निवेशकों ने इससे कई गुना ज्यादा निवेश जमीन में किया होगा।
पॉलिटिक्सवाला का  मकसद इस रिपोर्ट के जरिये मुख्यमंत्री मोहन यादव या उनके कुनबे को पाक साफ़ बताने का कतई नहीं। हमारी कोशिश रिपोर्ट के उन छिपे हुए तथ्यों को सामने लाना है जिससे भरम पैदा हो रहा है।

हम बिंदुवार रिपोर्ट में हुई चूक   पर बात करते हैं

ये  Investigation कैसे ? .

चूक नंबर 1. क्योंकि सीएम बनने के बाद कोई निजी संपत्ति नहीं बढ़ी

एक्सप्रेस की रिपोर्ट में  जमीन ख़रीदे के जो आंकड़ें दिए गए हैं। उसमे कौन सा आंकड़ा ऐसा है जो पब्लिक डोमेन में नहीं है, और उसे खोजकर लाया गया हो। खुद मुख्यमंत्री, उनकी पत्नी और बेटे , बहू को लेकर जो जमीन से जुडी जानकारी रिपोर्ट में है वो सभी मुख्यमंत्री अपने 2023 के चुनावी हलफनामे दे चुके हैं। उलटा इस खबर को देखकर ऐसा लगता है जैसे सीएम बनने के बाद मोहन यादव की संपत्ति में बढ़ोतरी हुई है।

जबकि इसी रिपोर्ट के हिसाब से ही देखें तो

– मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव चुनावी हलफनामे में  घोषित 17 एकड़ भूमि में  कोई बदलाव नहीं आया है।
–  पत्नी श्रीमती सीमा यादव के नाम दर्ज 12.29 एकड़ भूमि में भी सीएम बनने के बाद कोई बदलाव नहीं
– सीएम के पुत्र वैभव यादव के नाम दर्ज 16 एकड़ भूमि में भी सीएम बनने के बाद कोई बदलाव नहीं
–  सीएम की पुत्रवधू शालिनी यादव द्वारा खरीदी गई 10 एकड़ कृषि भूमि मास्टर प्लान क्षेत्र के बाहर है।
(यानी कुल मिलाकर मुख्यमंत्री बनने के बाद सीएम की फैमिली की जमीन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई )

चूक नंबर 2 .  क्योंकि सिद्धि विनायक देवकॉन में  सीएम और उनकी पत्नी हिस्सेदार ही  नहीं

एक्सप्रेस की रिपोर्ट में सिद्धि विनायक देवकॉन प्राइवेट लिमिटेड में मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी की हिस्सेदारी है। रिपोर्ट में इस  संबंध में जो जानकारी दी गई है वो तथ्यों से मेल नहीं खाती। यह कंपनी वर्ष 2008 में बनी । डॉ. मोहन यादव और उनकी पत्नी  2017 में ही इसके निदेशक पद से अलग हो चुके हैं। मार्च 2026 में अपने सभी शेयर भी त्याग चुके हैं। कंपनी के पास नवंबर 2023 में 68.43 एकड़ भूमि थी, जो जून 2026 में घटकर 65.69 एकड़ रह गई है।

चूक नंबर 3 .. क्योंकि उज्जैन मास्टर प्लान यादव के सीएम बनने के पहले ही लागू

एक्सप्रेस की रिपोर्ट से ऐसा आभास होता है कि मास्टरप्लान अपनी जमीनों के हिसाब से सीएम बनने के बाद तैयार करवाया गया। हकीकत ये है कि उज्जैन मास्टर प्लान-2035 मुख्यमंत्री बनने से पहले लागू हो चुका था। यह मास्टर प्लान मई 2023 से प्रभावशील है, जबकि डॉ. मोहन यादव ने 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री बनाए । ऐसे में सड़क हाईवे सीएम पद का प्रभाव करते हुए   अपनी जमीन के करीब से निकालने का आरोप तथ्यों से मेल नहीं खा रहा।

चूक नंबर 4 … क्योंकि सीएम की विस्तारित फैमिली 2010 से ही रियल स्टेट कारोबार में
एक्सप्रेस की रिपोर्ट इस फेर में डालती है  कि  चचेरे भाइयों ने मोहन यादव के मंत्री और मुख्यमंत्री बनते ही रियल एस्टेट की कंपनियां बनाकर कारोबार शुरू कर दिया। जबकि हकीकत में इस परिवार का रियल एस्टेट कारोबार 16 साल पुराना है। सीएम के चचेरे भाई ने 2010 में कंपनी शुरू करके उस
वक्त 100 बीघा जमीन पर एक प्रोजेक्ट लॉच किया था। यानी ये बात गले नहीं उतरती कि मुख्यमंत्री पद का लाभ लेने रियल एस्टेट का कारोबार शुरू किया।

चूक नंबर 5  ….इसी कालखंड  के दौरान दूसरे निवेशकों की खरीदी रफ़्तार नहीं बताई

एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मोहन यादव के सीएम बनते ही परिवार ने जमीन खरीदी की रफ़्तार बढ़ा दी। ठीक है, पर इसी दौरान उज्जैन और आसपास के इलाकों में जमीन खरीदारी की औसत रफ़्तार क्या रही? ये इस रिपोर्ट में नहीं बताया गया। बिना तुलना के किसी भी रिपोर्ट को जांचना बेहद कठिन होता है। बहुत संभव है कि उज्जैन से मुख्यमंत्री बनने और सिंहस्थ के चलते भविष्य में विकास की तेजी की संभावना को देखते हुएपूरे इलाके में निवेश, जमीन खरीदी  की रफ़्तार तेज रही हो।

उज्जैन में आने वाले बड़े प्रोजक्ट

मामला उज्जैन में जमीन खरीदी की रफ़्तार और हाईवे का है तो ये जान लेना जरुरी है कि उज्जैन इस वक्त तेजी से रफ़्तार पकड़ा रहा है। शिवराज सरकार के कार्यकाल में बने महाकाल लोक के बाद से ही यहाँ जमीन के कारोबार ने रफ़्तार पकड़ी है। देशभर से निवेशक यहाँ आ रहे हैं। कुछ बड़े  होटल समूह ने भी यहाँ निवेश किया है।

Vivanta by IHCL (Taj Group): इंडियन होटल्स कंपनी (IHCL) ने उज्जैन में 130 कमरों वाले नए विवांता होटल ला रहा है
Holiday Inn (IHG Hotels): मशहूर इंटरनेशनल ब्रांड IHG होटल्स उज्जैन में अपना पहला हॉलिडे इन रिसॉर्ट ला रहा है।
Cygnett Retreat (Wyndham): सिग्नेट होटल्स ने विंडहैम ब्रांड के साथ मिलकर ग्रीस की वास्तुकला (Greek Architecture) पर आधारित सिग्नेट रिट्रीट की शुरुआत की है, जिसमें 100 लग्जरी कमरे और बड़ा बैंक्वेट स्पेस शामिल है।

Lemon Tree Hotel: लेमन ट्री कंपनी वित्तीय वर्ष 2027 तक उज्जैन में 72 कमरों का एक नया होटल शुरू करने जा रही है।

अन्य प्रोजेक्ट जिसके चलते जमीन ने पकड़ी रफ़्तार

सिंहस्थ 2028 और मास्टर प्लान 2035 के तहत उज्जैन को एक आधुनिक और कनेक्टेड धार्मिक हब बनाया जा रहा है:

उज्जैन डोमेस्टिक एयरपोर्ट: दताना हवाई पट्टी को एक आधुनिक घरेलू हवाई अड्डे में बदला जा रहा है। इसमें ₹250 करोड़ की लागत से 1,800 मीटर का रनवे और नया टर्मिनल बनाया जा रहा है।

इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर: ₹2,935 करोड़ की लागत से 48 किलोमीटर लंबा 4-लेन एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है। इसके साथ ही मौजूदा इंदौर-उज्जैन रोड को भी 6-लेन में अपग्रेड किया गया है।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी: उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड हाईवे प्रोजेक्ट का काम चल रहा है, जो उज्जैन को सीधे देश के सबसे बड़े दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा।
विक्रम उद्योगपुरी विस्तार व औद्योगिक विकास: उज्जैन को मालवा रीजन का बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाया जा रहा है। हाल ही में अल्केम लैबोरेट्रीज (Alkem Labs) ने यहाँ ₹533 करोड़ के नए प्लांट की घोषणा की है।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट: महाकाल लोक के बाद अब पूरे शहर में स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, डिजिटल सिटीजन सर्विस और घाटों का सुंदरीकरण किया जा रहा है।

कुल मिलाकर इंदौर-उज्जैन एक तेजी से बढ़ता हुआ निवेशकों का हब है। इसमें मुख्यमंत्री का परिवार जो 2010  से इस कारोबार में है उसे भी उतना हीलाभ मिल रहा है जितना दूसरे कारोबारियों को। साथ ही मुख्यमंत्री के खुद के परिवार यानी पत्नी, बेटे, बहू की जमीनों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। मुख्यमंत्री के चचेरे भाइयों और  भतीजों के नाम पर भी जो जमीनें हैं वे सब सार्वजानिक हैं। कंपनी बनाकर ये बिज़नेस किया जा रहा है। रिपोर्ट में सीएम ‘के भाई, भतीजों का तो जिक्र है पर इन कंपनियों के दूसरे रियल एस्टेट के साझेदारों पर बात नहीं की गई है