दतिया हार के बाद…. बीजेपी में मंथन….!

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मुख्यमंत्री निवास में घंटों चली समीक्षा बैठक में दतिया उपचुनाव में मिली हार के कारणों पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक, संगठन के भीतर ही कई नेताओं और पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।

दतिया उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी के भीतर मंथन का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री निवास में हुई लंबी समीक्षा बैठक के बाद पार्टी के सामने अब सबसे बड़ा सवाल विपक्ष नहीं, बल्कि संगठन के भीतर उठ रहे असंतोष और भीतरघात के आरोप बन गए हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव के निवास पर हुई इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, चुनाव प्रभारी जगदीश देवड़ा और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। हालांकि, पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की अनुपस्थिति को लेकर रही।

बैठक खत्म होने के बाद नेताओं के चेहरे पर जीत की रणनीति नहीं, बल्कि हार की चिंता साफ दिखाई दे रही थी। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में बूथ स्तर से लेकर सेक्टर स्तर तक चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा की गई और यह जानने की कोशिश हुई कि आखिर पार्टी अपने मजबूत गढ़ में कैसे हार गई।

सूत्रों का दावा है कि दतिया शहर के 34 में से 32 पार्षद और बरौनी क्षेत्र के 15 में से 9 पार्षद भाजपा प्रत्याशी के खिलाफ काम करने के आरोपों के घेरे में हैं। बताया जा रहा है कि भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने पार्टी नेतृत्व के सामने शिकायतों का पूरा ब्यौरा रखा है।

खबर यह भी है कि इन शिकायतों के साथ कुछ कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग्स भी संगठन के सामने पेश की गई हैं, जिनके आधार पर भीतरघात के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि किस बूथ पर पार्टी कमजोर रही, किस नेता ने सक्रिय भूमिका निभाई और किन लोगों पर संगठन के खिलाफ काम करने के आरोप लगे। अब पार्टी की नजर सिर्फ विपक्ष पर नहीं, बल्कि अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं की गतिविधियों पर भी है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया गया था, तभी से दतिया में नाराजगी की खबरें सामने आने लगी थीं। चुनाव नतीजों के बाद अब यही सवाल उठ रहा है कि क्या इस नाराजगी का असर सीधे चुनाव परिणाम पर पड़ा।

सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में जिला संगठन में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। कई पदाधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है और संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की तैयारी भी शुरू हो गई है।

इस बीच, भाजपा नेता यशोधरा राजे सिंधिया का वह बयान भी चर्चा में है, जिसमें उन्होंने हार के बाद कहा था कि अब मंथन का समय आ गया है। ऐसे में सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि इस मंथन के बाद संगठन में क्या बदलाव होते हैं और जवाबदेही किस स्तर तक तय की जाती है।

दतिया की हार अब सिर्फ एक उपचुनाव का परिणाम नहीं रह गई है, बल्कि यह भाजपा के भीतर नेतृत्व, संगठन और आपसी भरोसे की बड़ी परीक्षा बन चुकी है

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