शिवराज सरकार पर आंच….चुनावी कालेधन पर सिंधिया समर्थकों ने दिग्विजय से मिलाया सुर, कांग्रेस से आये विधायक हो रहे एकजुट


घर में सुरंग … सीबीडीटी की रिपोर्ट से भाजपा में सिंधिया विरोधी खुश, पूरे मामले में सिंधिया समर्थक विधायकों से जुडी खबरें भाजपा का ही एक समूह मीडिया में कर रहा लीक

भोपाल। मध्यप्रदेश में कालेधन के लेनदेन की रिपोर्ट से भाजपा में ज्योतिरादित्य सिंधिया के विरोधी खुश हैं। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ( सीबीडीटी) की रिपोर्ट में सिंधिया समर्थक 8 विधायकों के सीधे-सीधे नाम हैं। इसके अलावा कांग्रेस से भाजपा में गए 6 विधायक भी इस रिपोर्ट में आरोपी हैं।

शिवराज सरकार यदि इस मामले में कार्रवाई करेगी तो उसकी सरकार में एक बार फिर अस्थिरता आ सकती है। सिंधिया ने सीधे कोई प्रतिक्रिया नही दी है, पर उनके समर्थक फिर से कांग्रेस की भाषा बोल रहे हैं। सिंधिया समर्थकों ने कार्रवाई होने पर शिवराज सरकार पर दबाव का भी मन बना लिया है।

चार आईपीएस अफसरों के साथ विधायकों के नाम आये हैं। सभी विधायक कह रहे हैं कि -ये उन्हें बदनाम करने की साजिश है। भाजपा ने जिस जोर-शोर से इसे मुद्दा बनाया था, अब वही उसके लिए मुश्किल बन गया है।

सिंधिया के करीबियों के अनुसार सिंधिया भी इस मुद्दे पर अपने सहयोगियों के साथ ही खड़े होंगे। कांग्रेस से भाजपा में आये 20 विधायक यदि एकजुट होते हैं, तो सरकार से भरोसा तो उठेगा ही।

इस रिपोर्ट में कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी के भी विधायक हैं। वे भी कह रहे हैं कि कि यदि हमने चुनाव में पैसा लिया है तो जांच एजेंसियों ने अब तक नोटिस क्यों नही दिया? पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का बयान भी कुछ इसी तरह का है। इस मामले में शिवराज सरकार के 2 मंत्री और 11 विधायक भी फंस रहे हैं, जो कांग्रेस से बीजेपी में आए हैं। ये 13 विधायक रिपोर्ट आने से पहले ही भाजपा में आ चुके थे।

इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का बयान आ चुका है, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिक्रिया नहीं आई। जबकि बीजेपी के 13 में से 8 विधायक (इसमें से दो प्रद्युमन सिंह तोमर और राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव मंत्री हैं) सिंधिया समर्थक हैं।

दिग्विजय के साथ तोमर और दत्तीगांव के
मिलते सुर देखकर शिवराज सांसत में

रिपोर्ट में सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का नाम नहीं है, लेकिन दिग्विजय सिंह पर लोकसभा चुनाव में 90 लाख रुपए मिलने के आरोप हैं। इस पर सफाई देने दिग्विजय सिंह ने शनिवार कहा कि हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं। साथ ही, सवाल खड़ा किया – यह कैसी जांच है, अभी तक मुझे एक भी नोटिस देकर बयान नहीं लिए गए।

दिग्विजय जैसा ही बयान सिंधिया के कट्टर समर्थक शिवराज सरकार के मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने दिया है। तोमर ने कहा यदि लेन-देन में हम शामिल हैं तो अब तक नोटिस क्यों नहीं दिया गया? शिवराज सरकार में उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव ने भी कहा कि आरोप झूठे हैं। हर तरह की जांच के लिए तैयार हूं।

बीजेपी में आने के बाद पवित्र हो गए?

कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने सोशल मीडिया पर लिखा है – कमलनाथ को बदनाम करने की साजिश लोकसभा चुनाव के पहले रची गई थी। सीबीडीटी की कपोल-कल्पित रिपोर्ट में शिवराज सरकार में सिंधिया समर्थक दो मंत्रियों और कई विधायकों के भी नाम आए हैं। क्या उन पर भी एफआईआर होगी? वे बीजेपी में आने के बाद पवित्र हो गए हैं?

फिलहाल मामले को विधि विभाग के
हवाले कर जांच रोकने पर सहमति

मंत्रालय सूत्रों ने दावा किया है कि सीबीडीटी की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस तथा प्रमुख सचिव मनीष रस्तोगी के साथ बैठक हो चुकी है। इसमें तय किया गया है कि विधि विभाग की राय लेने के बाद रिपोर्ट ईओडब्ल्यू को सौंपने का निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस मामले में कहा है कि रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर दोषी कोई भी हो, वैधानिकता के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

 


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