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Bihar election- बिहार में जैसे – जैसे विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे – वैसे आरोप प्रत्यारोप का दौर भी बढ़ता जा रहा है।
अब बिहार की वोटर लिस्ट में घोटाले की बात सामने आई है।
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल उठाया है।
उन्होंने केंद्र सरकार और भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
खेड़ा ने कहा कि बिहार में चल रहा वोटर लिस्ट पुनरीक्षण अभियान एक सुनियोजित साजिश है।
जिसके तहत लाखों मतदाताओं को जानबूझकर मताधिकार से वंचित किया जा रहा है।
भाजपा के इशारे पर चुनाव आयोग
पवन खेड़ा ने तीखा हमला करते हुए कहा, “अब निष्पक्षता नाम की कोई चीज नहीं बची है।
चुनाव आयोग हमारे सवालों का जवाब देने के बजाय बीजेपी के इशारों पर काम कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठा रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी
और बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी इस मामले को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
तेजस्वी यादव ने चुनाव आयोग को “बीजेपी का एजेंट” तक कह दिया।
दलित-आदिवासी और अल्पसंख्यकों पर निशाना
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के बिहार राज्य सचिव रामनरेश पांडे ने भी इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई है।
उन्होंने कहा, “बिहार में चल रहे विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण अभियान के नाम पर आदिवासी,
दलित और अल्पसंख्यक समुदायों को मतदाता सूची से हटाने की साजिश रची जा रही है।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिहार को बीजेपी द्वारा एक “राजनीतिक प्रयोगशाला” में बदला जा रहा है।
चुनाव आयोग इसकी अनदेखी कर रहा है।
निष्पक्षता पर बहस तेज
विपक्ष की तरफ से उठाए गए इन सवालों के बाद चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है।
आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक पारा और चढ़ सकता है।
अब देखना बड़ा रोचक होगा की इस सियासी दंगल में किसकी नैया पार लगेगी।
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