शर्म करो महाराज/ शिवराज .. नैतिकता के नाम पर सार्वजनिक मंचों पर भाजपा दिखा रही निर्लज्जता


अपने शासन के पंद्रह साल में महिला उत्पीड़न के रिकॉर्ड देखकर यदि शिवराज जी मौन और अफ़सोस रखेंगे तो पूरी ज़िंदगी कम पड़ जायेगी प्रायश्चित करने में

दर्शक 

इस वक्त मध्यप्रदेश की राजनीति में आयटम गीत गाये जा रहे हैं। हर मंच पर, रैली की शुरुवात और अंत इसी उच्चारण से हो रही। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की जुबान एक बार फिसली, पर भाजपा के नेता इस शब्द को एक दिन में लाखों बार उछाल रहे हैं? कमलनाथ ने किसी का नाम नहीं लिया। पर भाजपा में शिवराज से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया तक नाम ले लेकर इस मामले की पीड़िता को सामने खड़ा करके यही शब्द दोहरा रहे है।

दरअसल, अपमान का सिलसिला कौन चला रहा है? खुद भाजपा। कानून और नैतिकता भी ये कहती है कि जो भी शब्द किसी महिला के लिए अमर्यादित, असम्माननीय और उसकी अस्मिता के खिलाफ हैं वे दोबारा न कहे जाएं। उस महिला के पक्ष में भी नहीं। उस पीड़ित महिला का नाम लेना भी उसके जख्म को कुरेदना उसे प्रताड़ित और सार्वजनिक करना है।

शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया इतने कमजोर और उपलब्धिविहीन हो गए हैं कि एक महिला की आड़ में जीतने की कोशिश कर रहे हैं। दरअसल, भाजपा ने एक महिला को सत्ता प्राप्ति का मुद्दा बना लिया। सम्मान की बात तो सिर्फ दिखावा है, पूरी कोशिश है इस मामले को निर्लज्जता से उछालना। भले इसमें उस महिला का समाज में मज़ाक बनता रहे।

प्रदेश में राजनीतिक लाभ के लिए ये लाखों लोगों तक क्यों पहुंचाया जा रहा है। ये भी एक भ्रष्ट और निर्लज्ज आचरण है। ये आचरण वो लोग कर रहे हैं, जो जनप्रतिनिधि, कानून के जानकार और जिम्मेदार पदों पर हैं।

तमाम मामलों में स्वतः संज्ञान लेने वाली अदालतें, मानव अधिकार आयोग, महिला आयोग और चुनाव आयोग अपने तरफ से इस पर कोई रोक का कदम नहीं उठाएगा? क्या ये सब संस्थांयें भी सत्ता के लिए चल रही इस अपमान की श्रंखला को देखते रहेंगे?

सवाल ये भी है कि स्त्री के मान-सम्मान को चुनावी राजनीति में क्यों घसीटा जा रहा है। अफ़सोस वोट और चुनाव की जीत के लिए एक नारी के सम्मान की लड़ाई की आड़ में उस नारी को और पीड़ित साबित करने की होड़ मची है। सबसे बड़ी बात ये है कि ये सारे लोग चुनावों के अलावा ऐसे मुद्दों पर चुप ही रहते हैं।

हाथरस में एक दलित लड़की का रात के अँधेरे में बिना माँ-बाप परिवार की सहमति के अंतिम संस्कार कर दिया जाता है। तब ये समूह ख़ामोशी की चादर ओढ़ लेता हैं। उत्तरप्रदेश में बलात्कार के आरोपी अपने विधायक कुलदीप सेंगर और पूर्व सांसद स्वामी चिन्मयानंद  को बचाने में जान लगा देती है वो पार्टी आज एक शब्द से जाग्रत हो उठी। क्योंकि चुनाव का वक्त है।

मध्यप्रदेश पंद्रह साल महिलाओं के प्रति अत्याचार और बलात्कार की घटनाओं में देश में नम्बर वन रहा उसी सरकार के मुखिया का मौन धरना और अफ़सोस भी कई सवाल खड़े करता है। क्या राजनीति में जो महिला है, जो मंत्री है उसके सम्मान के लिए ही आपको मुखिया चुना गया है। या सिर्फ मुखिया बने रहने के लिए ही ये मुद्दा आप उठायेंगे।

जिस महिला के अपमान पर ये सब मौन रखा जा रही है। उनके नाम पर पिछले चुनाव में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि ये खाने तक तो ठीक है इन्हें अपना क्षेत्र मत सौंप दीजिये।तब वे कांग्रेस प्रत्याशी थीं इसलिए सबने जमकर इस बयान की चाशनी का मजा लिया। आज वे अपने दल में हैं तो उनका सम्मान याद आया। किसी भी स्त्री का सम्मान उसकी राजनीतिक जमीन को देखकर मत कीजिये।

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वरिष्ठ पत्रकार पुष्प रंजन ने हज़ारों बयानों में से बतौर नज़ीर  बयान याद दिलाये हैं। इनके शब्दों को पढ़िए। और खुद फैसला कीजिए की सामजिक और नैतिक रूप से राजनीति और राजनेता कहां खड़े हैं, हमने जिन्हे भी चुना है क्या वे हमारे वोट के लायक है ?

वाह क्या गर्लफ्रेंड है? आपने कभी देखा है 50 करोड़ की गर्लफ्रेंड को? -नरेंद्र मोदी
(सुनन्दा पुष्कर के बारे में)

– सोनिया गांधी ‘वेश्या’ थीं. एस्कॉर्ट एजेंसी के लिए काम करती थीं.–सुब्रमण्यन स्वामी

– मायावती जी एक वेश्या से भी ‘बदतर चरित्र’ की हो गई हैं. – दयाशंकर सिंह

-सोनिया गांधी ‘इटली की गुड़िया’ हैं. ‘जहर की पुड़िया’ हैं. – अश्विनी चौबे

– सोनिया गांधी ‘पूतना’ हैं. राहुल ‘विदेशी तोता’ हैं. – अश्विनी चौबे

-पंखुड़ी जी, ज्यादा पंख मत फरफराइए. ऐसी बात बोलूंगा कि शर्मसार हो जाओगी.
     प्रेम शर्मा (समाजवादी पार्टी की एक महिला प्रवक्ता के बारे में)

हम समझ नहीं सकते कि ममता बनर्जी पुरुष हैं या महिला हैं. मैं तो कहूंगा कि वह किन्नर बन गई हैं, जिन्हें आप ट्रेनों और बसों में देखते हैं.– श्यामपद मोंडल

इसके अलावा नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस की सांसद रेणुका चौधरी की हंसी की खिल्ली उड़ाते हुए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनकी तुलना शूर्पणखा से की थी।

क्या ये सारे बयान महिलाओं के सम्मान के हैं? ये शीर्ष नेताओं ने दिए हैं। तब ये सभी लोग चुप क्यों रहते हैं। क्योंकि तब चुनाव नहीं थे। मध्यप्रदेश 15 साल के भाजपा शासन में बलात्कार और महिला उत्पीड़न में देश में अव्वल रहा। उस वक्त शिवराज सिंह चौहान क्यों चुप रहे। आखिर प्रदेश की प्रत्येक महिला की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी है।

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