अपनी ज़िंदगी को कैमरे के पीछे से राजनीति में आगे लाने वालो जयललिता की मौत अब भी रहस्य बनी हुई है. फ़िल्मी दुनिया से राजनीति में कदम रखने वाली जयललिता की मौत के वक्त अस्पताल के कैमरे बंद थे. क्यों? ये बड़ा सवाल है. आखिर कैमरे बंद क्यों रखे गए. क्या उनकी मौत के पीछे कोई बड़ी साज़िश है. पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता के बारे में ये चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि चेन्नई के जिस अपोलो अस्पताल में जयललिता 75 दिन भर्ती रहीं, उन पूरे दिनों में अस्पताल के सभी कैमरे बंद थे.
यह जानकारी मीडिया को अपोलो अस्पताल के चेयरमैन डॉ. प्रताप सी रेड्डी ने दी. अस्पताल के 24 बेड वाले इंटेनसिव केयर यूनिट (आईसीयू) में अकेले की को ही रखा गया था.
रेड्डी ने पत्रकारों को बताया बजयललिता की मौत की जांच करने वाली ए. अरुमुगस्वामी आयोग के सामने अस्पताल ने सारे जरूरी दस्तावेज जमा करा दिए हैं.सीसीटीवी फुटेज जमा कराने के सवाल पर रेड्डी ने इससे साफ इंकार कर दिया. रेड्डी ने कहा, इलाज के पूरे 75 दिनों तक सभी सीसीटीवी कैमरे बंद थे. जयललिता के अस्पताल में भर्ती होते ही आईसीयू तक लोगों की पहुंच बंद कर दी गई. सभी मरीजों को दूसरे आईसीयू में दाखिला दिया जाने लगा. एक पूरा आईसीयू जयललिता के लिए रिजर्व था. हालांकि 24 कमरों में से सिर्फ एक रूम ही उपयोग में लिया जाता रहा. कैमरे इसलिए हटा दिए गए क्योंकि वे नहीं चाहते थे कि कोई और इसे देखे. विजिटर को भी वहां तक जाने की इजाजत नहीं थी.
रेड्डी ने कहा कि अस्पताल ने पूरी कोशिश की लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी. जयललिता को 22 सितंबर 2016 को अपोलो में भर्ती कराया गया था जहां 4 दिसंबर को उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई.
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