कभी अनुशासनहीनता के आरोप में 6 साल के लिए निष्कासित हुए महेश केवट को अचानक मैदान में उतारकर बीजेपी ने कांग्रेस खेमे में क्रॉस वोटिंग का खौफ पैदा कर दिया है।
उनका मुकाबला कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन से है। केवट के पास जरूरी नंबर नहीं, लेकिन अगर सीएम मोहन ने आलाकमान को तीसरे उम्मीदवार के लिए तैयार किया है तो जाहिर है तैयारी तगड़ी है।
मध्य प्रदेश की राज्यसभा सियासत में रविवार रात एक ऐसा सियासी भूचाल आया, जिसकी उम्मीद कांग्रेस ने सपने में भी नहीं की थी।
दो सीटों पर आसानी से जीत दर्ज करने वाली बीजेपी ने तीसरी सीट पर बुंदेलखंड के ओबीसी चेहरे महेश केवट को उतारकर पूरा चुनावी गणित ही पलट दिया है।
कुल मिलाकर मामला अब दिलचस्प है।
सोमवार को नामांकन के आखिरी दिन
मीनाक्षी नटराजन के मुकाबले महेश केवट ने नामांकन दाखिल किया।
बीजेपी उम्मीदवार के मैदान में आने से कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है।
वैसे दिलचस्प बात यह है कि महेश केवट का राजनीतिक सफर बेहद उतार-चढ़ाव वाला रहा है। नगरीय निकाय चुनाव के दौरान उन पर बीजेपी के ही अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ काम करने के गंभीर आरोप लगे थे,
जिसके बाद उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।
विधानसभा चुनाव से पहले 1 जून 2023 को तत्कालीन बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा ने उनका निलंबन निरस्त कर दिया था।
जिसके बाद संघ की पृष्ठभूमि से आने वाले केवट ने संगठन का भरोसा दोबारा जीता और अप्रैल में मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष बनने के बाद अब सीधे दिल्ली का टिकट कर लिया।राज्यसभा चुनाव के लिए प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद महेश केवट ने मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद से कल इस्तीफा दे दिया है। शासन ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
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