मणिपुर में NDA की वापसी: युमनाम खेमचंद सिंह बने 13वें मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति शासन समाप्त

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शपथ के साथ बदला सियासी माहौल

मणिपुर में करीब एक साल बाद एक बार फिर निर्वाचित सरकार का गठन हुआ है। भाजपा नेता युमनाम खेमचंद सिंह ने राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।

इसी के साथ ही राज्य में एनडीए की सरकार की औपचारिक वापसी हो गई। खेमचंद मैतेई समुदाय से आते हैं और इंफाल वेस्ट के सिंगजामेई क्षेत्र से विधायक हैं।

दो डिप्टी सीएम, तीन समुदायों का प्रतिनिधित्व

नई सरकार में सामाजिक संतुलन पर खास ध्यान दिया गया है। नगा समुदाय से आने वाले लोसी दिखो और कुकी समुदाय की नेमचा किपगेन को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है। नेमचा किपगेन राज्य की पहली महिला डिप्टी सीएम बनी हैं।

उन्होंने दिल्ली स्थित मणिपुर भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शपथ ली, जबकि लोसी दिखो ने मणिपुर में ही पदभार संभाला।

356 दिन बाद हटा राष्ट्रपति शासन

इसी दिन मणिपुर में 356 दिनों से लागू राष्ट्रपति शासन को समाप्त कर दिया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसके लिए औपचारिक मंजूरी दी। उल्लेखनीय है कि मैतेई और

कुकी समुदायों के बीच हिंसा के चलते फरवरी 2025 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने इस्तीफा दिया था, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था।

दिल्ली बैठकों में तय हुआ मुख्यमंत्री का चेहरा

सरकार गठन से पहले दिल्ली में भाजपा विधायक दल और एनडीए सहयोगी दलों की अहम बैठकें हुईं। 3 फरवरी को भाजपा विधायकों ने युमनाम खेमचंद सिंह को अपना नेता चुना, जबकि 4 फरवरी को एनडीए की बैठक में मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पदों पर सहमति बनी।

माना जा रहा है कि गृह मंत्री पद के लिए कोंथौजम गोविंदास सिंह का नाम भी चर्चा में हैं।

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मध्यमार्गी छवि से शांति की उम्मीद

युमनाम खेमचंद सिंह को बीरेन सिंह का करीबी जरूर माना जाता है, लेकिन उनकी पहचान एक अपेक्षाकृत मध्यमार्गी नेता की है। वे हिंसा के बाद राहत शिविरों और प्रभावित इलाकों का दौरा करने वाले पहले मैतेई नेताओं में शामिल रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विविध समुदायों को प्रतिनिधित्व देकर और संवाद पर जोर देकर नई सरकार राज्य में स्थायी शांति की दिशा में कदम बढ़ा सकती है

 

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