PM CARES: फंड पर संसद में सवाल क्यों नहीं पूछे जा सकते?
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने लोकसभा सचिवालय को स्पष्ट किया है कि पीएम केयर्स फंड, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष और राष्ट्रीय रक्षा कोष से जुड़े सवाल संसद में पूछे जाना नियमों के अनुरूप नहीं है।
पीएमओ ने इसके पीछे लोकसभा के नियमों का हवाला देते हुए कहा है कि ये फंड सरकार की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी के दायरे में नहीं आते।
क्या है पूरा मामला?
पीएमओ का कहना है कि इन फंड्स से संबंधित कोई भी सवाल, शून्यकाल सूचना या विशेष उल्लेख लोकसभा में स्वीकार्य नहीं माना जाएगा। कारण यह बताया गया कि ये फंड सरकारी बजट का हिस्सा नहीं हैं।
यह फैसला किसने लिया?
यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की ओर से लोकसभा सचिवालय को दी गई है। हालांकि, इस विषय पर पीएमओ ने आधिकारिक बयान देने से परहेज किया है।
यह फैसला कब लिया गया?
पीएमओ ने 30 जनवरी 2026 को लोकसभा सचिवालय को इस संबंध में पत्र भेजा था, जिसकी जानकारी अब सामने आई है।
यह मामला कहां से जुड़ा है?
यह पूरा प्रकरण संसद की कार्यवाही और लोकसभा नियमों से जुड़ा है, जिसका असर देश की सर्वोच्च विधायी संस्था पर पड़ता है।
पीएम केयर्स पर सवाल क्यों नहीं?
पीएमओ के अनुसार, पीएम केयर्स फंड समेत तीनों कोष पूरी तरह जनता के स्वैच्छिक योगदान से बने हैं। इनमें भारत सरकार की संचित निधि से कोई पैसा शामिल नहीं है।
लोकसभा नियम 41(2) के तहत ऐसे विषयों पर सवाल नहीं पूछे जा सकते जो:
- सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी न हों
- या ऐसे संस्थानों से जुड़े हों जो सरकार के प्रति जवाबदेह न हों
पीएम केयर्स फंड कैसे काम करता है?
पीएम केयर्स फंड को 27 मार्च 2020 को एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत किया गया था। सरकार पहले ही अदालत में कह चुकी है कि यह न तो संविधान के तहत बना है और न ही संसद के कानून से। इसी कारण यह RTI कानून के तहत भी नहीं आता।
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सुप्रीम कोर्ट ने भी पहले कहा था कि पीएम केयर्स और एनडीआरएफ अलग-अलग उद्देश्य वाले फंड हैं और इनके बीच तुलना या हस्तांतरण का सवाल नहीं उठता।
सवाल पॉलिटिक्सवाला
अब सवाल यह उठता है कि जब करोड़ों रुपये का जनदान इन फंड्स में जाता है, तो संसद के भीतर इन पर चर्चा की सीमा कहां तक होनी चाहिए? क्या नियमों के दायरे में रहते हुए पारदर्शिता की कोई और व्यवस्था बनाई जा सकती है यह बहस अभी जारी है।
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