जम्मू-कश्मीर सरकार देगी 40 साल की लीज पर, आपदा प्रभावित भूमिहीन परिवारों को जमीन
जम्मू-कश्मीर सरकार ने वर्ष 2025 में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित भूमिहीन परिवारों के पुनर्वास की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बताया कि सरकार ने ऐसे परिवारों को पांच मरला जमीन 40 साल की लीज पर देने को मंजूरी दे दी है।
यह जमीन पूरी तरह आवासीय उद्देश्य के लिए होगी और इसके लिए किसी प्रकार का प्रीमियम नहीं लिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह जानकारी विधानसभा में भाजपा विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया के प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।
कैबिनेट का फैसला और सरकारी आदेश
मुख्यमंत्री ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने इस संबंध में निर्णय लिया था, जिसके बाद 2 जनवरी 2026 को सरकारी आदेश जारी किया गया। आदेश के तहत बाढ़, भूस्खलन, बादल फटने और भूकंप जैसी आपदाओं में बेघर हुए प्रत्येक भूमिहीन परिवार को राज्य की जमीन का आवंटन किया जाएगा।
यह जमीन लीज के आधार पर दी जाएगी ताकि प्रभावित परिवारों को स्थायी आवास मिल सके और वे दोबारा सामान्य जीवन की और लौट सकें।
40 साल की लीज, मामूली ग्राउंड रेंट
सरकार के मुताबिक, जमीन के बदले किसी भी तरह का प्रीमियम नहीं लिया जाएगा। लाभार्थियों को केवल ₹10 प्रति मरला वार्षिक ग्राउंड रेंट देना होगा। यह लीज 40 वर्षों के लिए होगी, जिसे नियमों के तहत सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद आगे बढ़ाया भी जा सकेगा।
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मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जमीन का आवंटन सरकारी आदेश में तय शर्तों के अधीन होगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे और सही लाभार्थियों तक योजना पहुंचे।
उधमपुर जिले में 6,400 से अधि क परिवारों को मदद
मुख्यमंत्री ने बताया की उधमपुर जिले में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन से प्रभावित 6,400 से अधिक परिवारों को वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। कुल 6,449 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार मुआवजा प्रदान किया गया है।
इसमें उधमपुर, चेनानी, रामनगर और लट्टी-मरोठी तहसीलें शामिल हैं। यह सहायता राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (SDRF) के नियमों के तहत की गई।
कितनी तहसील को कितनी राहत
आंकड़ों के मुताबिक, उधमपुर तहसील में 2,666 परिवारों को लगभग ₹9.32 करोड़, चेनानी तहसील में 1,208 परिवारों को ₹5 करोड़ से अधिक, रामनगर तहसील में 2,298 परिवारों को ₹7.86 करोड़, जबकि लट्टी-मरोठी तहसील में 277 परिवारों को ₹1 करोड़ से अधिक की राहत राशि दी गई।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नुकसान का आकलन फील्ड टीमों द्वारा किया गया और सत्यापन के बाद राशि सीधे प्रभावित परिवारों के खातों में भेजी गई। सरकार का कहना है की जमीन आवंटन और वित्तीय सहायता के जरिए आपदा प्रभावितों का पुनर्वास सुनिश्चित किया गया।
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