Modi Cabinet Reshuffle

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मोदी कैबिनेट में फेरबदल की आहट तेज, गिरिराज से चिराग तक कई नाम चर्चा में

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मोदी कैबिनेट में फेरबदल की आहट तेज, गिरिराज से चिराग तक कई नाम चर्चा में; जानिए किसकी बढ़ेगी जिम्मेदारी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली केंद्र सरकार में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। दिल्ली से पटना तक इस बात की अटकलें लगाई जा रही हैं कि अगर कैबिनेट में बदलाव हुआ तो किन चेहरों की छुट्टी हो सकती है और किन नेताओं को सरकार में नई जिम्मेदारी मिल सकती है। हालांकि, फिलहाल इसे लेकर केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

बिहार से जुड़े नेताओं को लेकर इन चर्चाओं ने खास जोर पकड़ा है। सबसे अधिक निगाहें केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पर हैं। बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह नरेंद्र मोदी की पहली सरकार से लगातार केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे हैं।

उनकी उम्र 73 वर्ष से अधिक है और इसी वजह से यह चर्चा है कि पार्टी अब किसी युवा चेहरे को मौका देने पर विचार कर सकती है। साथ ही लंबे समय से एक ही सरकार में मंत्री रहने और मंत्रालय के प्रदर्शन को लेकर भी बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं।

हालांकि गिरिराज सिंह के पक्ष में भी मजबूत राजनीतिक समीकरण हैं। वे भाजपा के मुखर हिंदुत्ववादी चेहरों में गिने जाते हैं और बिहार के भूमिहार समाज में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में पार्टी यदि सामाजिक समीकरण और राजनीतिक प्रभाव को प्राथमिकता देती है तो उन्हें कैबिनेट में बनाए रखा जा सकता है।

यदि उनकी जगह किसी नए नेता को मौका मिलता है तो नवादा सांसद विवेक ठाकुर का नाम चर्चा में है। पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी ठाकुर के बेटे विवेक को अपेक्षाकृत युवा और गंभीर छवि वाला नेता माना जाता है।

जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता ललन सिंह के मामले में बदलाव के बजाय जिम्मेदारी बढ़ने की चर्चा है। फिलहाल उनके पास पंचायती राज तथा मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय हैं। राजनीतिक रूप से यह संभावना है कि उन्हें कोई बड़ा विभाग सौंपा जा सकता है। वहीं जदयू के रामनाथ ठाकुर के मंत्री पद पर बने रहने की संभावना जताई जा रही है।

लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान के पद पर भी खतरे की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। केंद्र में अपनी पार्टी के एकमात्र सांसद होने के कारण उनका सरकार में बने रहना लगभग तय माना जा रहा है।

हालांकि, उनके मंत्रालय में परिवर्तन को लेकर चर्चा है। यह भी अटकलें हैं कि उन्हें उनके पिता रामविलास पासवान से जुड़ा रहा कोई महत्वपूर्ण विभाग मिल सकता है।

एचएएम प्रमुख जीतन राम मांझी भी केंद्र सरकार में बने रह सकते हैं। वे अपनी पार्टी के एकमात्र सांसद हैं और NDA में उनकी राजनीतिक भूमिका को देखते हुए उनके पद में बदलाव की संभावना कम बताई जा रही है।

बिहार भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नित्यानंद राय को लेकर हालांकि प्रमोशन की चर्चा है। वर्तमान में गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय को अमित शाह के करीबी नेताओं में माना जाता है। हाल में शाह के उनके दिल्ली आवास पर पहुंचने के बाद इन अटकलों को और बल मिला। उन्हें स्वतंत्र प्रभार या कैबिनेट स्तर की जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

सतीश चंद्र दुबे और राजभूषण निषाद के नाम संभावित बदलाव वाले चेहरों में शामिल हैं। सतीश दुबे के स्थान पर उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल से किसी ब्राह्मण नेता को आगे बढ़ाने की चर्चा है, जबकि राजभूषण निषाद के प्रदर्शन और उनके सामाजिक प्रभाव को लेकर सवाल उठने की बात कही जा रही है।

हालांकि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए निषाद समुदाय के प्रतिनिधित्व को बनाए रखने का विकल्प भी भाजपा के सामने हो सकता है।

इसी बीच जदयू की ओर से केंद्र में एक अतिरिक्त मंत्री पद की मांग किए जाने की चर्चा भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। ऐसी स्थिति में संजय झा का नाम संभावित दावेदार के तौर पर सामने आ रहा है।

इसके अलावा बिहार से किसी राजपूत नेता को केंद्र में जगह देने की संभावना पर भी चर्चा है। राधामोहन सिंह, राजीव प्रताप रूड़ी और जनार्दन सिंह सिग्रीवाल के नाम इस संदर्भ में लिए जा रहे हैं।

ये सभी संभावनाएं राजनीतिक चर्चाओं पर आधारित हैं। अगर मंत्रिमंडल में बदलाव होता है तो उसमें उम्र, प्रदर्शन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, जातीय संतुलन और NDA सहयोगियों की मांग जैसे कई पहलू निर्णायक हो सकते हैं। अब देखना होगा कि संभावित फेरबदल में किसकी कुर्सी कायम रहती है और किस नए चेहरे को मोदी सरकार में जगह मिलती है

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