दो सैन्य अफसरों के रेज़िग्नेशन और रिटायरमेंट का सच!
पिछले कुछ दिनों में दो बड़ी खबरों ने चर्चा का माहौल बना दिया है। बालाकोट एयरस्ट्राइक के हीरो अभिनंदन वर्धमान का वायुसेना छोड़ना, और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मिलिट्री एडीसी मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल का इस्तीफा। आइए दोनों घटनाओं को समझते हैं।
वायुसेना से नई पारी की ओर अभिनंदन वर्धमान
2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक के दौरान पाकिस्तानी F-16 विमान को मार गिराने वाले और वीर चक्र से सम्मानित ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्धमान ने 31 मार्च 2026 को भारतीय वायुसेना से समयपूर्व सेवानिवृत्ति ली।
करीब दो दशक की सेवा के बाद लिया गया यह फैसला उनका निजी निर्णय था। इसके बाद, अगस्त 2026 में उन्होंने गोवा स्थित क्षेत्रीय एयरलाइन FLY91 को कॉमर्शियल पायलट के रूप में जॉइन किया।
यानी यह “इस्तीफा” नहीं बल्कि तय प्रक्रिया के तहत सेवानिवृत्ति थी, जिसके बाद उन्होंने नागरिक उड्डयन क्षेत्र में नया करियर चुना। उनका सामान्य रिटायरमेंट 2037 में होना था, जब वे 54 वर्ष के होते लेकिन उससे पहले ही उनका एयरफोर्स से रिटायरमेंट कई सवाल पीछे छोड़कर गया।
यह याद रखना जरूरी है कि 2019 में बालाकोट स्ट्राइक के बाद अभिनंदन देश भर में हीरो के तौर पर उभरे थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित पूरी सरकार ने इसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया था। उस समय की चर्चा और आज की सेवानिवृत्ति के बीच सात साल का फासला है दोनों घटनाओं को एक-दूसरे से जोड़ने का कोई आधिकारिक आधार नहीं है।
मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल का इस्तीफा
लगभग इसी कड़ी में एक और खबर सामने आई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के मिलिट्री एडीसी मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने अपनी सेवा से इस्तीफा दे दिया। मिलिट्री एडीसी की भूमिका बेहद संवेदनशील मानी जाती है, क्योंकि इस अधिकारी को राष्ट्रपति की सुरक्षा, आवाजाही और प्रोटोकॉल की जिम्मेदारी संभालनी होती है। सांब्याल राष्ट्रपति मुर्मू के कार्यकाल में लंबे समय तक उनके साथ छाया की तरह जुड़े रहे।
मेजर ने वीडियो जारी कर बताया था, इस्तीफे का सच
अपने फैसले पर उन्होंने एक वीडियो जारी कर सफाई दी कि सेना की वर्दी पहनना उनका बचपन का सपना था और उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इसे समय से पहले उतारना पड़ेगा। उनके अनुसार, कुछ व्यक्तिगत और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते यह फैसला लेना पड़ा, और यह पूरी तरह निजी कारणों से लिया गया कदम है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में किसी न किसी रूप में देश की सेवा जारी रखेंगे।
यह स्वाभाविक है कि दो चर्चित सैन्य अधिकारियों का लगभग एक ही समय पर सेवा छोड़ना सवाल खड़े करता है। लेकिन उपलब्ध तथ्यों के अनुसार, दोनों मामले पूरी तरह अलग हैं एक नियोजित सेवानिवृत्ति के बाद नागरिक करियर की शुरुआत है, तो दूसरा व्यक्तिगत कारणों से लिया गया इस्तीफा।
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