इंदौर: के पलासिया थाना क्षेत्र में रात के समय पुलिस गश्त के दौरान हुई एक घटना ने पुलिस के अनुशासन और कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले को लेकर भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट ने पुलिस आयुक्त, इंदौर को लिखित शिकायत सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि इस घटना से आम नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों को लेकर चिंता पैदा हुई है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय की बताई जा रही है जब क्षेत्र में नियमित रात्रिकालीन गश्त चल रही थी। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि पलासिया थाना प्रभारी अपनी शासकीय वाहन के साथ मौके पर मौजूद थे। आरोप है कि इसी वाहन से एक पुलिस जवान, अभिषेक सैंगर, भी वहां पहुंचा था। बताया गया है कि संबंधित जवान उस समय वर्दी में नहीं था और कथित तौर पर नशे की हालत में था, जो पुलिस नियमों के विपरीत माना जाता है।
यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार निजी स्टील प्लांट में हुआ भीषण ब्लास्ट, 6 मजदूरों की मौत!
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उसी दौरान क्षेत्र में तैनात दो से तीन नाइट चौकीदार ठंड से बचने के लिए आग ताप रहे थे और अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। आरोप है कि पुलिस जवान ने बिना किसी स्पष्ट कारण के चौकीदारों और आसपास मौजूद लोगों से अभद्र व्यवहार किया। बताया जा रहा है कि जवान ने कथित रूप से गाली-गलौज की और जबरन विवाद की स्थिति उत्पन्न करने की कोशिश की, जिससे मौके पर तनाव का माहौल बन गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी मौके पर मौजूद थाना प्रभारी को दी, लेकिन उस समय कोई ठोस या प्रभावी कदम उठाया नहीं गया। इसके बाद पीड़ित पक्ष और स्थानीय निवासियों ने मानवाधिकार संगठन से संपर्क किया। भारतीय मानव अधिकार सहकार ट्रस्ट का कहना है कि पुलिस से अपेक्षा की जाती है कि वह आम जनता के साथ संयमित और कानून सम्मत व्यवहार करे लेकिन इस घटना ने पुलिस आचरण को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा की हैं।
यह भी पढ़ें- वसंत पंचमी पर भोजशाला में पूजा और नमाज दोनों की अनुमति, सुप्रीम कोर्ट का संतुलित फैसला
इस प्रकरण को लेकर ट्रस्ट ने पुलिस आयुक्त को सौंपे गए अपने आवेदन में कई मांगें रखी हैं। संगठन ने दोषी पुलिस जवान के खिलाफ तत्काल विभागीय कार्रवाई की मांग की है। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि जांच के दौरान किसी वरिष्ठ अधिकारी की लापरवाही या संरक्षण सामने आता है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए। ट्रस्ट ने यह भी आग्रह किया है कि पूरे मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और उपलब्ध साक्ष्यों को गंभीरता से परखा जाए।
मानवाधिकार संगठन का दावा है कि घटना से जुड़ा वीडियो उसके पास मौजूद है, जिसे शिकायत के साथ सबूत के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा, इस शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री एवं इंदौर के प्रभारी मंत्री डॉ. मोहन यादव को भी भेजी गई है ताकि मामले पर उच्च स्तर से संज्ञान लिया जा सके। फिलहाल पुलिस प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है जबकि स्थानीय निवासी और मानवाधिकार संगठन पूरे प्रकरण में शीघ्र और सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
You may also like
-
जले नोटों वाले जस्टिस वर्मा का दुखी मन से इस्तीफा, अब एफआईआर की संभावना
-
मध्यप्रदेश यूथ कांग्रेस के 38 पदाधिकारियों को तीन महीने का अल्टीमेटम, नहीं सुधरे तो बाहर
-
वंदे मातरम् …कांग्रेस पार्षद बोलीं, हम किसी के बाप की नहीं सुनते, कांग्रेस भी जाए भाड़ में !
-
इंदौर में कांग्रेस पार्षद फौजिया और रुबीना का वंदे मातरम गाने से इंकार, बोलीं एक बाप की औलाद हो तो बुलवाकर दिखाओ
-
ईरान की सभ्यता मिटाने निकले ट्रम्प ने टेके घुटने, सीज़फायर !
