एथेनॉल मिले पेट्रोल पर उठे सवालों का नितिन गडकरी ने दिया जवाब, कहा- एक भी गाड़ी खराब हुई हो तो सबूत दीजिए
देशभर में एथेनॉल मिले पेट्रोल को लेकर लगातार बहस जारी है। सोशल मीडिया पर कई लोग दावा कर रहे हैं कि इससे गाड़ियों का माइलेज कम हो गया है, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि उनकी कारों के इंजन तक खराब हो गए हैं। इन दावों और आलोचनाओं पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है।
मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में नितिन गडकरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इथेनॉल को बढ़ावा देने में उनका कोई निजी स्वार्थ नहीं है।
उन्होंने कहा, “हमारे परिवार के पास चीनी मिलें पहले से हैं, जिन्हें मेरे बेटे संभालते हैं। लेकिन देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग (पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने) का पूरा प्रोग्राम पेट्रोलियम मंत्रालय चलाता है, मेरा इससे कोई लेना-देना नहीं है।”
गडकरी ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि उनके बेटों के पूरे कारोबार में इथेनॉल का हिस्सा केवल 10 फीसदी है। वहीं, यदि पूरे देश के स्तर पर देखा जाए, तो देश के कुल इथेनॉल कारोबार में उनके बेटों की फैक्टरियों की हिस्सेदारी 0.5 फीसदी से भी कम है।
उन्होंने यह भी बताया कि उनके बेटों की कंपनियों पर करीब 1600 करोड़ रुपये का कर्ज है। ऐसे में यह कहना कि वे अपने परिवार के फायदे के लिए नीतियां बना रहे हैं, पूरी तरह गलत और झूठा है।
क्या इथेनॉल से सचमुच खराब हो रही हैं गाड़ियाँ?
सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को गडकरी ने पूरी तरह खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियां खराब हो रही हैं।
उन्होंने खुली चुनौती देते हुए कहा, “देश में साल 2004 से यानी पिछले 22 सालों से पेट्रोल में इथेनॉल मिलाया जा रहा है। आज तक कोई ऐसा व्यक्ति सामने नहीं आया जिसकी गाड़ी इथेनॉल के कारण खराब हुई हो। अगर किसी की गाड़ी खराब हुई है, तो वह मुझे बताए।”
माइलेज घटने की शिकायत पर क्या बोले गडकरी?
जब गडकरी से पूछा गया कि ARAI (ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया) की रिपोर्ट के मुताबिक E20 ईंधन से माइलेज में करीब 6 प्रतिशत की कमी देखी गई है, तो उन्होंने इसे स्वीकार किया।
उन्होंने कहा कि यह सच है कि इथेनॉल की कैलोरी वैल्यू (Calorific Value) सामान्य पेट्रोल से थोड़ी कम होती है, जिससे कुछ परिस्थितियों में माइलेज में मामूली अंतर आ सकता है।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी गाड़ी का माइलेज केवल ईंधन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि सड़क की स्थिति और ट्रैफिक के दबाव का भी उस पर असर पड़ता है।
गडकरी ने तर्क दिया कि भले ही माइलेज में मामूली कमी हो, लेकिन इथेनॉल पेट्रोल के मुकाबले काफी सस्ता है और इससे प्रदूषण भी कम होता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जब देश में पूरी तरह से फ्लेक्स-फ्यूल इंजन (Flex-Fuel Engines) आ जाएंगे, तब माइलेज का यह अंतर भी खत्म हो जाएगा।
सिर्फ इथेनॉल नहीं, हर वैकल्पिक ईंधन पर सरकार का फोकस
गडकरी ने स्पष्ट किया कि वे सिर्फ इथेनॉल के पक्षधर नहीं हैं, बल्कि हर उस ईंधन का समर्थन करते हैं जो भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सके।
उन्होंने कहा कि सरकार इलेक्ट्रिक वाहन (EV), हाइड्रोजन फ्यूल, बायो-सीएनजी (Bio-CNG) और मिथेनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधनों पर भी तेजी से काम कर रही है।
उनके अनुसार देश का पहला इलेक्ट्रिक स्कूटर, इलेक्ट्रिक कार, इलेक्ट्रिक बस, इलेक्ट्रिक ट्रक और हाइड्रोजन ट्रक भी लॉन्च किया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य भारत को प्रदूषण मुक्त बनाना, पेट्रोलियम आयात पर होने वाले लाखों करोड़ रुपये के खर्च को कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है।
कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिया जवाब
यह पूछे जाने पर कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (Crude Oil) 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ जाए, तो क्या इथेनॉल आर्थिक रूप से फायदेमंद रहेगा?
इस पर गडकरी ने माना कि कच्चे तेल की कीमतें भारत के नियंत्रण में नहीं हैं और यदि कीमतें बहुत ज्यादा गिरती हैं, तो इथेनॉल आर्थिक रूप से उतना लाभदायक नहीं रह सकता।
हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना और वर्ष 2070 तक देश को कार्बन न्यूट्रल बनाने के लक्ष्य को हासिल करना है।
ब्राजील का दिया उदाहरण
गडकरी ने कहा कि ब्राजील में 1970 के दशक से 100 प्रतिशत इथेनॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहां टोयोटा, सुजुकी, हुंडई जैसी बड़ी कंपनियों की गाड़ियां बिना किसी शिकायत के चल रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है, ताकि प्रदूषण कम हो, महंगे ईंधन पर निर्भरता घटे और आम जनता को राहत मिल सके।
