राज्यसभा में केंद्र सरकार ने बताया कि 2021 से अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर 74.5 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। विदेश मंत्रालय ने निवेश और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की जानकारी भी दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यसभा में विस्तृत जानकारी दी है। विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा ने संसद में बताया कि जनवरी 2021 से अब तक प्रधानमंत्री के विदेशी दौरों पर कुल 74.5 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
यह जानकारी राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में दी गई। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और माकपा सांसद डॉ. वी. शिवदासन ने सरकार से विदेश यात्राओं पर हुए खर्च, विभिन्न देशों के साथ हुए समझौतों और भारत में आए विदेशी निवेश का पूरा ब्योरा मांगा था।
विदेश मंत्रालय ने अपने जवाब में कहा कि प्रधानमंत्री की सभी आधिकारिक विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड संसद के सामने रखा गया है। मंत्रालय के मुताबिक, इन दौरों का मकसद दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ भारत के राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को मजबूत करना है।
सरकार ने कहा कि विदेश यात्राओं के दौरान कई देशों के साथ व्यापार, ऊर्जा, तकनीक और रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौते किए गए हैं।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि अप्रैल 2021 से दिसंबर 2025 के बीच भारत को 381.8 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्राप्त हुआ। सरकार का दावा है कि मजबूत कूटनीतिक संबंधों और उच्चस्तरीय बैठकों ने निवेश बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।
हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि विदेशी निवेश कई आर्थिक और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
संसद में दिए गए जवाब में कुछ पुरानी विदेश यात्राओं के खर्च का भी जिक्र किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011 में अमेरिका दौरे पर करीब 10.74 करोड़ रुपये, फ्रांस यात्रा पर 8.33 करोड़ रुपये, जबकि 2013 में रूस दौरे पर 9.95 करोड़ रुपये और जर्मनी यात्रा पर 6.02 करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
सरकार ने कहा कि ये आंकड़े उस समय दर्ज किए गए वास्तविक खर्च को दर्शाते हैं।
प्रधानमंत्री की विदेश यात्राएं लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का विषय रही हैं। सरकार इन यात्राओं को भारत की वैश्विक छवि मजबूत करने और आर्थिक अवसर बढ़ाने का माध्यम मानती है, जबकि विपक्ष अक्सर इन दौरों पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल उठाता है।
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कई देशों के साथ रक्षा, व्यापार और ऊर्जा के क्षेत्र में नए समझौते किए हैं। सरकार का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका के पीछे इन यात्राओं का बड़ा योगदान है।
दूसरी ओर, विपक्ष यह सवाल उठाता रहा है कि विदेश यात्राओं पर खर्च होने वाली बड़ी रकम का सीधा फायदा देश के आम नागरिकों तक कितना पहुंच रहा है। रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी है।
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