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Supreme Court On Betting Apps Ban-ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी ऐप (Supreme Court On Betting Apps Ban) पर बैन लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने केंद्र सरकार को एक नोटिस भी जारी किया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच ने केंद्र को यह नोटिस जारी किया। सभी बेटिंग अप्प्स को बेटिंग स्टोर से हटाने की मांग को लेकर याचिका दायर की गयी थी
ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी ऐप पर (Supreme Court On Betting Apps) बैन लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा बयान दे दिया। कोर्ट ने कहा कि शायद आप इस गलतफहमी में हैं कि इसे कानून के ज़रिए रोका जा सकता है। सट्टेबाजी ऐप पर लगे बैन…सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को नोटिस, जानें पूरा मामला
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका (PIL) पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा, जिसमें सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी एप्लिकेशन को रेग्युलेट करने की मांग की गई है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने के. ए. पॉल द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया।
पॉल ने दावा किया कि कई बच्चे ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए के ऐप्स में फंसने के बाद आत्महत्या कर चुके हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन इन्फ्लुएंसर, अभिनेता और क्रिकेटर इन ऐप्स का प्रचार कर रहे हैं, जिससे बच्चे सट्टेबाजी की ओर आकर्षित हो रहे हैं। पॉल ने कहा कि मैं उन लाखों माता-पिताओं की ओर से आया हूँ जिनके बच्चों ने पिछले कुछ वर्षों में जान गंवाई है। सट्टेबाजी ऐप पर लगे बैन…सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को नोटिस, जानें पूरा मामला
याचिकाकर्ता ने ये कहा-
ऐप के प्रचार से जा रही मासूमों की जिंदगी
याचिकाकर्ता डॉ. केए पॉल ने कहा कि मैं यहां उन लाखों माता-पिता की ओर से हूं, जिनके बच्चे मर गए।
तेलंगाना में 1023 लोगों ने आत्महत्या कर ली।
25 बॉलीवुड और टॉलीवुड अभिनेता और प्रभावशाली लोग मासूमों की जिंदगी से खेल रहे हैं।
इस मामले में बहुत सी एफआईआर दर्ज की गई हैं। हमारे युवाओं पर सट्टेबाजी ऐप का बहुत बुरा असर पड़ रहा है।
सिगरेट पर उसके हानिकारक होने के बारे में चेतावनी लिखी होती है, लेकिन सट्टेबाजी के मामले में नहीं।
जस्टिस सूर्यकांत की अहम टिप्पणी
मूल रूप से हम आपके साथ हैं, इसे रोका जाना चाहिए। लेकिन शायद आप इस गलतफहमी में हैं कि इसे कानून के ज़रिए रोका जा सकता है। ठीक वैसे ही जैसे हम कानून के बावजूद लोगों को हत्या करने से नहीं रोक सकते। हमने इंटरनेट दिया है। माता-पिता एक टीवी देखते हैं, बच्चे दूसरे टीवी देखते हैं। यह पूरी तरह से सामाजिक विचलन है। भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को अर्जी की सॉफ्ट कॉपी दी जाए। अगर हमें बाद में ज़रूरत महसूस हुई तो सभी राज्यों को नोटिस जारी किए जाएंगे।
PIL में क्या हैं याचिकाकर्ता की मांगें
भारत सरकार को ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी और जुए को प्रतिबंधित या विनियमित करने के लिए एक समान केंद्रीय कानून बनाना चाहिए।
Google, Apple और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म को सभी गैर-अनुपालन वाले सट्टेबाजी ऐप को तुरंत हटाने का निर्देश दिए जाएं.
TRAI और MeitY को विदेशी सट्टेबाजी प्लेटफ़ॉर्म तक पहुंच को अवरुद्ध करने का निर्देश दिया जाए.
सट्टेबाजी ऐप से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों की जांच करने के लिए ED और RBI को निर्देश दिए जाएं.
सुप्रीम कोर्ट एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें केंद्र को यह घोषित करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी कि सभी ऑनलाइन और ऑफलाइन सट्टेबाजी ऐप जुए की परिभाषा के अंतर्गत आते हैं और सख्त केंद्रीय और राज्य कानूनों के तहत उन पर तत्काल प्रतिबंध या नियंत्रण का निर्देश दिया जाए।
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