-छह जून को बड़े बदलाव हो सकते हैं, वित्त और गृह जैसे बड़े मंत्रालय बदले जाएंगे !
अभिषेक कानूनगो
इंदौर। पन्द्रह बरस के बाद प्रदेश में कांग्रेस सरकार लौटी तो मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भले ही मंत्रालय बांटने में देरी को हो, लेकिन अब ये आलम है कि मंत्रियों को अपने से ज्यादा दिलचस्पी दूसरे विभागों में ज्यादा है। अब इस आधार पर 6 जून को मंत्रिमंडल में बड़ा उलट-फेर होने जा रहा है। गृह और वित्त जैसे बड़े मंत्रालय बदले जा सकते हैं।
सरकार को नंबरों में मजबूत करने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार जरूरी है। इसी कारण तीनों निर्दलीय विधायकों को बड़ा दायित्व मिल रहा है। ज्योति सिंधिया खेमे के लिए अच्छी खबर नहीं है। इमरती देवी और प्रदुम्न सिंह को हटाने की कवायद भी शुरू हो गई है। वहीं स्कूली शिक्षामंत्री प्रभुराम चौधरी का विभाग बदला जा सकता है। कुछ मंत्रियों के भार कम करने का मन भी मुख्यमंत्री कमलनाथ बना चुके हैं। इसमें गृहमंत्री बाला ब”ान और पीसी शर्मा शामिल हैं। ऊर्जा मंत्री प्रियवृतसिंह का विभाग भी बदला जा सकता है। सेहत मंत्री तुलसी सिलावट और खेलमंत्री जीतू पटवारी के विभाग बढ़ाए जाने की बात भी कही जा रही है। गांवों में कांग्रेस की पेठ मजबूत करने के लिए कमलेश्वर पटेल को पंचायती ग्रामीण विभाग लेकर किसी पुराने कांग्रेसी विधायक को सौंपा जा सकता है। वैसे भी कांग्रेस सुभाष यादव के जाने के बाद सहकारी नेता की तलाश में हैं। उनके बेटे सचिन यादव कृषिमंत्री बनाया गया है, लेकिन गांव से लोकसभा में मिली बड़ी हार सचिन के कामों पर सवालिया निशान खड़ा करती है। विधायक केपी सिंह को पहली खेप में लेने की तैयारी हो गई थी, लेकिन मंत्रालय को लेकर बात नहीं बनी। वहीं ठाकुर मंत्रियों की तादाद भी ज्यादा हो रही थी, लेकिन अब केपी को कमलनाथ सरकार का बड़ा मंत्रालय दिया जा सकता है। लगातार केपी कमलनाथ के ईर्द-गिर्द नजर आ रहे हैं। जिन मंत्रियों पर गाज गिरने वाली है, उनमें सबसे पहला नाम सुरेन्द्र सिंह बघेल हनी का है। पर्यटन मंत्री बनाए जाने पर हनी का विरोध हुआ था। बदनावर विधायक राजवद्र्धन दत्तीगांव को नाराज कर धार जिले से दो मंत्री बना दिए गए थे। कृषि मंत्रालय पर भी गाज गिर सकती है। जिस दो लाख की कर्जमाफी के कारण कमलनाथ सरकार प्रदेश में आई थी वो आखिरी पंक्ति तक नहीं पहुंच पाया, लेकिन सचिन यादव के साथ उनके बड़े भाई अरुण यादव का विटो पावर लगा है। इस विभाग के प्रमुख सचिव राजेश राजौरा का भी हाल ही में तबादला किया गया है। बसपा और सपा के विधायकों को इसी दिन निगम मंडलों की जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। बुरहानपुर के विधायक सुरेन्द्र शेरा को पहले ही कमलनाथ मंत्री बनाने के घुंघरू बांध चुके हैं। बिराहुलाल को भी निगम मंडल में लिया जा सकता है। सिंधिया गुट से इमरती देवी का नाम हटाया जाता है तो इसका सीधा फायदा राजवद्र्धन सिंह को मिलेगा। कमलनाथ सर्वे करवा रहे हैं। जिस तरह पहली खेप में कबीला प्रथा चली थी और आकाओं ने अपने मंत्रालय समेट लिए थे। अब दूसरी बार में सर्जरी की तैयारी है। कौनसा मंत्री विभाग की समझ रखता है और उसकी दिलचस्पी कहां है, इस बात का ध्यान रखा जा रहा है। खुद मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने विभाग कम करेंगे। तरुण भानोट से वित्त विभाग लेकर किसी दूसरे बड़े मंत्री को सौंपे जाने की बात भी चल रही है। अभी वल्लभ भवन में खांका तैयार हो रहा है।
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