‘लड़कियां रेप का आनंद लेती हैं…’, विवादित बयान पर यूट्यूबर टीजी मोहनदास गिरफ्तार, जंतर-मंतर पर फायरिंग वाले बयान से भी मचा था बवाल
केरल के चर्चित राइट विंग कमेंटेटर और यूट्यूबर टीजी मोहनदास अपने एक विवादित वीडियो को लेकर कानूनी शिकंजे में फंस गए हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और महिला प्रदर्शनकारियों को लेकर कथित तौर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में केरल पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। हालांकि, गिरफ्तारी के बाद 10 अगस्त को तिरुवनंतपुरम की अदालत ने उन्हें जमानत दे दी।
मामला उस समय गरमाया जब मोहनदास के यूट्यूब चैनल ‘पथरिका’ पर अपलोड किए गए वीडियो के कुछ हिस्से सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए।
इन वीडियो में उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की। एक बयान में उन्होंने प्रदर्शन में शामिल महिलाओं को लेकर ऐसी बात कही, जिस पर सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक भारी विरोध शुरू हो गया।
मोहनदास पर आरोप है कि उन्होंने यह भी कहा था कि अगर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी उनके हाथ में होती तो वह पहले इलाके में कर्फ्यू लगाते, प्रदर्शनकारियों को कई बार वहां से हटने का मौका देते और इसके बाद भीड़ नहीं हटने पर पुलिस फायरिंग का आदेश देते।
उनके इस बयान को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा भड़काने वाली टिप्पणी के तौर पर देखा गया और इसी के बाद उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज होने लगीं।
विवाद बढ़ने के बाद केरल पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया। पुलिस ने उनके घर से कुछ इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी जब्त किए हैं, जिन्हें जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजे जाने की बात कही गई है।
पुलिस उनके यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया पर मौजूद कंटेंट की भी जांच कर रही है। जांच के दौरान मामले में और धाराएं जोड़े जाने की संभावना भी जताई गई थी।
मोहनदास के बयान को लेकर आरएसएस का नाम भी चर्चा में आया। हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद संघ की ओर से साफ किया गया कि मोहनदास के बयान उनके निजी विचार हैं और संगठन उनसे सहमत नहीं है।
आरएसएस से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया कि मोहनदास संगठन में किसी पद पर नहीं हैं। संघ की ओर से उनकी टिप्पणियों की कड़ी निंदा किए जाने की बात सामने आई है।
इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। अलग-अलग छात्र और युवा संगठनों की ओर से मोहनदास के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इस तरह की भाषा न केवल महिलाओं और प्रदर्शनकारियों का अपमान करती है, बल्कि इससे समाज में डर और तनाव का माहौल भी बन सकता है।
दूसरी तरफ, विवाद बढ़ने के बाद टीजी मोहनदास ने अपने बयान का बचाव किया। उन्होंने दावा किया कि सोशल मीडिया पर उनके लगभग 31 मिनट लंबे वीडियो का केवल एक छोटा हिस्सा काटकर वायरल किया गया और पूरी चर्चा देखने पर संदर्भ अलग दिखाई देगा। उ
नका कहना था कि मलयालम भाषा में इस्तेमाल होने वाले हास्य, व्यंग्य और मुहावरों का अंग्रेजी या दूसरी भाषाओं में अनुवाद होने पर मूल भाव कई बार बदल जाता है।
जंतर-मंतर पर फायरिंग वाले बयान को लेकर भी मोहनदास ने सफाई दी। उनका दावा था कि उन्होंने किसी वास्तविक घटना में गोली चलाने की अपील नहीं की थी, बल्कि एक काल्पनिक स्थिति के जरिए यह बताने की कोशिश की थी कि हिंसक प्रदर्शन की स्थिति में प्रशासन किस तरह कार्रवाई कर सकता है।
हालांकि, उनके इस स्पष्टीकरण के बावजूद विवाद थमा नहीं और पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ी।
पुलिस ने रविवार को कोच्चि स्थित उनके घर से उन्हें हिरासत में लिया था। इसके बाद उन्हें तिरुवनंतपुरम साइबर पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां आगे की कानूनी कार्रवाई हुई। उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने के बाद पुलिस और कोर्ट परिसर में भी सुरक्षा बढ़ाई गई।
