कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा की तैयारी कर रहे हैं। केरलम में प्राकृतिक चिकित्सा, योग और फिटनेस पर दे रहे ध्यान…
सियासत में उम्र सिर्फ एक आंकड़ा है और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह इसे अपनी सक्रियता से साबित करने की तैयारी में नजर आ रहे हैं। करीब 80 की उम्र में दिग्विजय सिंह ने खुद को एक लंबी पदयात्रा के लिए तैयार करना शुरू कर दिया है।
इसके लिए वह केरलम में प्राकृतिक चिकित्सा, योग और फिटनेस पर ध्यान दे रहे हैं। उनकी यह तैयारी मध्य प्रदेश से लेकर कांग्रेस की राजनीति तक चर्चा का विषय बनी हुई है।
दिग्विजय सिंह ने 20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करने का ऐलान किया है। प्रस्तावित यात्रा लंबी दूरी की होगी और इसके लिए शारीरिक रूप से फिट रहना बेहद जरूरी है। इसी वजह से पदयात्रा से पहले वह केरल में प्राकृतिक उपचार और फिटनेस के जरिए खुद को तैयार कर रहे हैं।
दिग्विजय सिंह की इस यात्रा को सिर्फ स्वास्थ्य और फिटनेस से जोड़कर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे राजनीतिक संदेश भी देखा जा रहा है।
एक तरफ मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी लगातार संगठन को सक्रिय करने और सरकार के खिलाफ मुद्दे उठाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ दिग्विजय सिंह अपनी उम्र के इस पड़ाव पर भी राजनीतिक रूप से सक्रिय रहने का संदेश दे रहे हैं।
अयोध्या तक प्रस्तावित पदयात्रा को राम मंदिर से जुड़े चंदा मामले को लेकर जनजागरण अभियान के तौर पर बताया जा रहा है। दिग्विजय सिंह की टीम भी यात्रा को लेकर तैयारियों में जुटी है। यात्रा का रूट, रोजाना तय की जाने वाली दूरी, ठहरने की व्यवस्था और अन्य जरूरी इंतजामों पर काम किया जा रहा है।
ऐसे में दिग्विजय सिंह की केरल में फिटनेस तैयारी को महज स्वास्थ्य से जोड़कर देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। करीब 80 साल की उम्र में लंबी पदयात्रा का फैसला अपने आप में राजनीतिक सक्रियता का संदेश भी देता है।
दिग्विजय सिंह लंबे समय से मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के प्रमुख रणनीतिकारों में रहे हैं और उनकी सक्रियता पार्टी के भीतर भी खास महत्व रखती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि दिग्विजय सिंह की यह फिटनेस तैयारी सिर्फ उज्जैन से अयोध्या तक की पदयात्रा को पूरा करने के लिए है या इसके जरिए वह कांग्रेस की राजनीति में अपनी मौजूदगी का भी संदेश देना चाहते हैं।
क्योंकि प्रदेश में जीतू पटवारी संगठन की कमान संभाल रहे हैं, लेकिन दिग्विजय सिंह भी लगातार अपनी राजनीतिक सक्रियता बनाए हुए हैं।
20 अक्टूबर को जब दिग्विजय सिंह उज्जैन से अयोध्या की ओर कदम बढ़ाएंगे, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह यात्रा सिर्फ एक राजनीतिक अभियान बनकर रहती है या मध्य प्रदेश और कांग्रेस की राजनीति में कोई नया संदेश भी देती है।
इतना जरूर है कि दिग्विजय सिंह ने अपनी सक्रियता से यह संकेत दिया है कि उम्र बढ़ने के बावजूद वह खुद को राजनीतिक तस्वीर से बाहर मानने के लिए तैयार नहीं हैं।
अब उनकी पदयात्रा कितनी लंबी होगी और इसका राजनीतिक असर कितना दिखाई देगा, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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