शशि थरूर ने राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को बताया फ्लॉप तो वेणुगोपाल ने दी नसीहत…
कांग्रेस सांसद शशि थरूर के एक बयान ने पार्टी के अंदर नई बहस छेड़ दी है। राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को लेकर थरूर की टिप्पणी के बाद कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल को सामने आकर सफाई देनी पड़ी।
वेणुगोपाल ने पार्टी नेताओं को सार्वजनिक बयान देते समय सावधानी बरतने की सलाह दी और कहा कि ऐसी टिप्पणियों से विपक्ष के बजाय बीजेपी को फायदा मिल सकता है।
दरअसल, शशि थरूर ने राहुल गांधी के छात्र केंद्रित अभियान की तुलना जंतर-मंतर पर चल रहे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP के प्रदर्शन से की।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के अभियान को युवाओं और आम लोगों के बीच वैसा असर नहीं मिला, जैसा CJP के आंदोलन को देखने को मिला। थरूर का कहना था कि कांग्रेस को इस बात पर विचार करना चाहिए कि आखिर उसकी बात युवा पीढ़ी तक उस प्रभाव के साथ क्यों नहीं पहुंच पाई, जिसकी उम्मीद की जा रही थी।
थरूर ने यह टिप्पणी मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान की थी। उन्होंने साफ किया कि उनका मकसद राहुल गांधी या कांग्रेस नेतृत्व पर व्यक्तिगत हमला करना नहीं था। उनके मुताबिक, इस पूरे मामले को पार्टी के खिलाफ बयान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि कांग्रेस को इससे सीख लेने की जरूरत है।
थरूर ने खास तौर पर Gen Z के साथ राजनीतिक दलों के संवाद को लेकर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि अगर युवाओं के बीच किसी राजनीतिक अभियान की पकड़ उम्मीद के मुताबिक नहीं बन पा रही है,
तो पार्टी को यह देखना चाहिए कि वह युवाओं की बात सही तरीके से सुन पा रही है या नहीं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कांग्रेस युवा पीढ़ी की सोच और उसकी प्राथमिकताओं को ठीक से समझने में कहीं पीछे रह गई है।
थरूर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने मीडिया में थरूर की टिप्पणी सुनी है, लेकिन वह पूरे संदर्भ से परिचित नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर थरूर ने ऐसा बयान दिया है तो उन्हें खुद अपनी बात पर सफाई देनी चाहिए।
वेणुगोपाल ने कांग्रेस नेताओं को सीधे तौर पर नसीहत देते हुए कहा कि पार्टी के भीतर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सार्वजनिक मंच पर ऐसी बातें करने से बचना चाहिए जिनसे बीजेपी को राजनीतिक फायदा मिल सके।
उनका कहना था कि राहुल गांधी की किसी कमी को लेकर बार-बार सार्वजनिक चर्चा करना आखिरकार बीजेपी के लिए ही फायदेमंद साबित होगा।
हालांकि, वेणुगोपाल ने थरूर की नीयत पर सवाल नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि थरूर ने जानबूझकर राहुल गांधी या पार्टी को नुकसान पहुंचाने के इरादे से यह बात कही होगी। यानी एक तरफ वेणुगोपाल ने बयान को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने थरूर की मंशा को लेकर नरम रुख भी रखा।
दरअसल, राहुल गांधी पिछले कुछ समय से छात्रों और युवाओं से सीधे संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। ‘छात्रों की गूंज’ इसी अभियान का हिस्सा है। कांग्रेस इस कार्यक्रम के जरिए शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाने की कोशिश कर रही है।
राहुल गांधी इससे पहले कोटा और देहरादून में भी छात्रों के बीच कार्यक्रम कर चुके हैं और 8 अगस्त को प्रयागराज में भी ऐसा ही कार्यक्रम हुआ।
दूसरी ओर, जंतर-मंतर पर CJP की ओर से NEET परीक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया गया। शशि थरूर पहले ही इस आंदोलन को लेकर अपना समर्थन जता चुके हैं और प्रदर्शनकारियों के मुद्दों पर बातचीत की जरूरत की बात कह चुके हैं।
यही वजह है कि थरूर की ताजा टिप्पणी को कांग्रेस के भीतर ज्यादा अहम माना जा रहा है। एक तरफ पार्टी राहुल गांधी के अभियान को युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के प्रयास के तौर पर देख रही है, वहीं थरूर का कहना है कि सिर्फ कार्यक्रम करने से बात नहीं बनेगी, यह भी समझना होगा कि युवा उस संदेश को किस तरह ले रहे हैं।
थरूर ने अपनी बात को बाद में स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी को पार्टी नेतृत्व पर हमला समझना सही नहीं होगा।
उनका जोर इस बात पर था कि राजनीतिक दलों को नई पीढ़ी के लिए ज्यादा जगह बनानी होगी। उनके मुताबिक, युवाओं को सिर्फ राजनीतिक कार्यक्रमों में भीड़ के रूप में देखने के बजाय उन्हें राजनीति की दिशा तय करने में भी भूमिका देनी होगी।
इस पूरे विवाद ने कांग्रेस के भीतर एक पुरानी चुनौती को फिर सामने ला दिया है पार्टी की युवा वोटरों तक पहुंच और विपक्ष की राजनीति में राहुल गांधी की भूमिका। थरूर के बयान ने जहां पार्टी को आत्ममंथन का मौका बताया है, वहीं वेणुगोपाल की प्रतिक्रिया से साफ है कि कांग्रेस नेतृत्व सार्वजनिक बयानबाजी को लेकर अब ज्यादा सतर्क रहना चाहता है।
