प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिवराज सिंह चौहान की मुलाकात हुई, वहीं कैलाश विजयवर्गीय, ज्योतिरादित्य सिंधिया और बीजेपी के अन्य नेताओं की दिल्ली में सक्रियता भी चर्चा में रही….
मध्य प्रदेश की सियासत में दतिया उपचुनाव के नतीजे के बाद दिल्ली में बीजेपी के बड़े नेताओं की सक्रियता ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। 3 अगस्त को दतिया का नतीजा आने के बाद अगले ही दिन से दिल्ली में मध्य प्रदेश के कई बड़े नेताओं की केंद्रीय नेतृत्व के साथ मुलाकातों का दौर देखने को मिला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिवराज सिंह चौहान की मुलाकात हुई, वहीं कैलाश विजयवर्गीय, ज्योतिरादित्य सिंधिया और बीजेपी के अन्य नेताओं की दिल्ली में सक्रियता भी चर्चा में रही।
दतिया में बीजेपी की हार इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि यह सीट लंबे समय तक पार्टी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक पहचान से जुड़ी रही है। ऐसे में चुनावी नतीजे के बाद बीजेपी के भीतर स्थानीय संगठन, उम्मीदवार चयन और चुनावी रणनीति को लेकर मंथन की चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक है।
हालांकि, इन मुलाकातों को सीधे नेतृत्व परिवर्तन से जोड़ने का अभी कोई आधिकारिक आधार सामने नहीं आया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान की मुलाकात ने सबसे ज्यादा राजनीतिक ध्यान खींचा। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन दतिया के नतीजे के ठीक बाद हुई इस बैठक को राजनीतिक नजरिए से अहम माना जा रहा है।
शिवराज सिंह चौहान फिलहाल केंद्र सरकार में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री हैं और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर उनका लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है।
इसी बीच कैलाश विजयवर्गीय की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी। विजयवर्गीय मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री होने के साथ बीजेपी संगठन में भी लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
ऐसे में उनकी दिल्ली सक्रियता को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, मुलाकात में किन मुद्दों पर बातचीत हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी। सिंधिया का ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में लंबे समय से प्रभाव रहा है और दतिया भी इसी क्षेत्र का हिस्सा है। इसलिए दतिया के नतीजे के बाद सिंधिया की राजनीतिक सक्रियता पर नजर होना स्वाभाविक है।
हालांकि, उनकी मुलाकात का एजेंडा क्या था, इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात को भी दतिया के नतीजे के संदर्भ में देखा जा रहा है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में बीजेपी की चुनावी रणनीति और संगठन की भूमिका को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं।
ऐसे में यह चर्चा भी है कि पार्टी चुनावी प्रदर्शन को लेकर फीडबैक जुटा रही है या फिर आगे की रणनीति पर विचार कर रही है।
दतिया की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे नरोत्तम मिश्रा का नाम भी इस पूरे घटनाक्रम में चर्चा में है। चुनाव में बीजेपी की हार के बाद स्थानीय समीकरणों और पार्टी की रणनीति को लेकर सवाल उठे हैं। दिल्ली में उनकी सक्रियता को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हैं, लेकिन किसी विशेष मुलाकात या उसके एजेंडे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए इन चर्चाओं को फिलहाल राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
मध्य प्रदेश बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की भूमिका भी आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण हो सकती है। दतिया के नतीजे की अगर संगठनात्मक समीक्षा होती है तो प्रदेश अध्यक्ष को केंद्रीय नेतृत्व के सामने चुनावी स्थिति और संगठन से जुड़ी रिपोर्ट रखनी पड़ सकती है।
ऐसे में उनकी दिल्ली यात्रा और केंद्रीय नेतृत्व के साथ संभावित बैठक पर भी राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं।
इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल मध्य प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर उठ रहा है। हालांकि, अभी तक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जगह किसी दूसरे नेता को मुख्यमंत्री बनाए जाने की कोई आधिकारिक घोषणा या ठोस संकेत सामने नहीं आया है।
इसलिए फिलहाल ऐसी चर्चाओं को राजनीतिक अटकलों से आगे बढ़कर देखना उचित नहीं होगा।
दतिया की हार ने बीजेपी के सामने जरूर कई सवाल खड़े किए हैं। पार्टी इस नतीजे को स्थानीय स्तर की हार मानकर आगे बढ़ती है या संगठन और चुनावी रणनीति में बदलाव करती है, यह आने वाले समय में साफ होगा।
दिल्ली में बीजेपी के बड़े नेताओं की लगातार सक्रियता ने इस चर्चा को जरूर तेज कर दिया है कि पार्टी के भीतर मध्य प्रदेश को लेकर मंथन चल रहा है।
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