संतों के समर्थन से मजबूत हुई चंपत राय की दावेदारी, क्या फिर संभालेंगे राम मंदिर ट्रस्ट की कमान?
अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर एक बार फिर हलचल बढ़ गई है। चढ़ावे से जुड़े विवाद के बाद महासचिव पद से इस्तीफा दे चुके चंपत राय की संभावित वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। ट्रस्ट के भीतर फिलहाल स्थायी महासचिव को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है और अंतिम फैसला जांच तथा आगामी बैठकों के बाद ही होने की संभावना है।
चढ़ावे से जुड़ा मामला सामने आने के बाद जून में चंपत राय और ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दिया था। बाद में ट्रस्ट ने दोनों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए और कृष्ण मोहन को अंतरिम जिम्मेदारी सौंपी गई।
चंपत राय की वापसी की चर्चा क्यों तेज हुई?
अब कहानी का अगला अध्याय चंपत राय के समर्थन में बनते माहौल से जुड़ा है। सूत्रों के मुताबिक, विश्व हिंदू परिषद की एक बैठक में उनके पक्ष को समर्थन मिलने के बाद अयोध्या के संत समाज के बीच भी उनकी भूमिका को लेकर चर्चा हुई।
संतों के एक वर्ग का कहना है कि राम मंदिर आंदोलन से लेकर मंदिर निर्माण की लंबी प्रक्रिया तक चंपत राय की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उनका तर्क है कि किसी व्यक्ति पर आरोप लगना और जांच में दोषी साबित होना दो अलग बातें हैं।
इसलिए यदि जांच में चंपत राय की भूमिका पर कोई आपत्ति साबित नहीं होती है, तो उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें दोबारा जिम्मेदारी देने पर विचार किया जा सकता है।
संत समाज का समर्थन कितना अहम?
अयोध्या में संतों की राय राम मंदिर से जुड़े फैसलों में हमेशा महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। यही वजह है कि चंपत राय के समर्थन में संतों की सक्रियता को उनकी संभावित वापसी के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि चंपत राय भी अयोध्या में संत-महंतों से मुलाकात कर रहे हैं। अलग-अलग धार्मिक स्थलों और आश्रमों में उनकी मौजूदगी ने इस चर्चा को और हवा दी है कि क्या वे दोबारा ट्रस्ट की जिम्मेदारी संभालने की तैयारी कर रहे हैं।
उनके समर्थकों की ओर से उनकी सादगी और लंबे संगठनात्मक जीवन को भी सामने रखा जा रहा है। हालांकि, इन दावों का अंतिम महत्व तभी होगा जब चढ़ावे से जुड़े मामले की जांच पूरी होकर स्थिति स्पष्ट होगी।
अभी ट्रस्ट की जिम्मेदारी किसके पास है?
चंपत राय के इस्तीफे के बाद ट्रस्ट के कामकाज को अंतरिम तौर पर कृष्ण मोहन संभाल रहे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रस्ट की व्यवस्थाओं और वित्तीय प्रक्रियाओं को लेकर भी निगरानी बढ़ाई गई है। चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी आगे कदम उठाए जा रहे हैं।
2 सितंबर को ट्रस्ट की बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ट्रस्ट की आगे की प्रशासनिक व्यवस्था और प्रमुख पदों को लेकर तस्वीर कुछ और साफ हो सकती है। हालांकि, स्थायी महासचिव को लेकर अंतिम फैसला जांच की स्थिति पर भी निर्भर कर सकता है।
क्या बजरंग लाल बागड़ा भी विकल्प हैं?
चंपत राय के अलावा विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा का नाम भी संभावित विकल्पों में चर्चा में बताया जा रहा है। ऐसे में यदि जांच या कानूनी प्रक्रिया के कारण चंपत राय की वापसी में देरी होती है, तो ट्रस्ट के सामने दूसरे नाम पर विचार करने का विकल्प मौजूद रह सकता है।
यानी फिलहाल मुकाबला किसी आधिकारिक घोषणा तक नहीं पहुंचा है। चंपत राय की वापसी की चर्चा जरूर तेज है, लेकिन इसे अभी अंतिम फैसला मानना जल्दबाजी होगी।
अब नजर SIT की जांच पर
पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी जांच की रिपोर्ट होगी। चंपत राय की वापसी तभी मजबूत आधार हासिल कर पाएगी, जब जांच में उनकी भूमिका को लेकर स्थिति साफ होगी। मीडिया रिपोर्टों में भी यह सामने आया है कि चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच और उससे जुड़े प्रशासनिक फैसले अभी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
इसलिए आने वाले दिनों में तीन चीजें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहेंगी जांच की अंतिम स्थिति, राम मंदिर ट्रस्ट की आगामी बैठक और महासचिव पद पर होने वाला फैसला।
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