ट्रेडिंग के लालच में बने साइबर ठग! उज्जैन से दिल्ली तक फैला गोल्ड फ्रॉड का नेटवर्क
मध्य प्रदेश के उज्जैन में पुलिस ने एक ऐसे हाई-प्रोफाइल साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसमें शामिल आरोपी उच्च शिक्षित और B.Tech पास युवा हैं।
पुलिस के अनुसार, ये युवक पिछले तीन वर्षों से क्रिप्टो ट्रेडिंग से जुड़े हुए थे, लेकिन अधिक मुनाफा कमाने की चाहत उन्हें साइबर अपराध की दुनिया में ले गई। जांच में सामने आया है कि यह गिरोह गोल्ड कॉइन खरीदने के बहाने साइबर ठगी के पैसों को वैध बनाने का काम कर रहा था और इसके तार दिल्ली के साइबर अपराधियों से जुड़े हुए हैं।
उज्जैन की माधवनगर थाना पुलिस ने होटल हीरा पैलेस से कशिश बढ़ानी, राहुल उर्फ शानू और अनिमेश उर्फ अन्नी नामक तीन युवकों को गिरफ्तार किया है। तीनों नर्मदापुरम जिले के निवासी हैं और तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपी पिछले तीन साल से सक्रिय रूप से क्रिप्टो ट्रेडिंग कर रहे थे और इसी दौरान उनकी पहचान दिल्ली स्थित साइबर अपराधियों से हुई।
जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी प्रतिष्ठित ज्वेलरी शोरूम में पहुंचकर गोल्ड कॉइन खरीदने का सौदा करते थे। इसके बाद वे शोरूम का QR Code स्कैन कर उसकी जानकारी दिल्ली में बैठे साइबर अपराधियों को भेजते थे। दिल्ली की टीम देशभर के लोगों को फर्जी मोबाइल अपडेट लिंक भेजकर उनके मोबाइल फोन हैक कर लेती थी। जैसे ही पीड़ित का फोन रीस्टार्ट होता, उसके बैंक खाते से रकम सीधे ज्वेलर्स के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती थी। आरोपी सोना लेकर निकल जाते और बाद में उसे दूसरी जगह बेचकर नकदी प्राप्त कर लेते थे।
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित थी। दिल्ली में बैठे मास्टरमाइंड के पास विभिन्न बैंक खातों, Paytm व एक्सचेंज अकाउंट्स की ट्रांजैक्शन लिमिट का पूरा डेटा मौजूद रहता था। उसी लिमिट के आधार पर उज्जैन में बैठे आरोपी गोल्ड खरीदते थे और फिर साइबर ठगी के जरिए उतनी ही रकम ज्वेलर्स के खाते में ट्रांसफर करवाई जाती थी।
अब तक इस मामले में राजस्थान, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई पीड़ितों की पहचान हो चुकी है। राजस्थान के नागौर निवासी मोहम्मद नासिर से 2.88 लाख रुपये, पंजाब के सुरिंदर सिंह से 95 हजार रुपये और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी मनोज कुमार से लगभग 99 हजार रुपये की साइबर ठगी की पुष्टि हुई है। पुलिस का मानना है कि देशभर में इस गिरोह द्वारा की गई ठगी की रकम इससे कहीं अधिक हो सकती है।
गिरफ्तार आरोपियों से मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और गोल्ड खरीदने की रसीदें बरामद की गई हैं। पुलिस अब दिल्ली सहित अन्य राज्यों में जांच का दायरा बढ़ा रही है और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर उच्च शिक्षित और तकनीकी रूप से दक्ष युवा आसान और त्वरित कमाई के लालच में अपराध की राह क्यों चुन रहे हैं। पुलिस को उम्मीद है कि आगे की जांच में इस साइबर गोल्ड फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े कई और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
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