वेल्लाप्पल्ली दौर का अंत? केरल हाईकोर्ट ने SNDP योगम प्रमुख को क्यों किया अयोग्य
तिरुवनंतपुरम: करीब तीन दशक से अधिक समय तक सामाजिक संगठन श्री नारायण धर्म परिपालना (SNDP) योगम का नेतृत्व करने वाले वेल्लाप्पल्ली नटेसन का प्रभाव अब कमजोर पड़ता दिखाई दे रहा है। केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में नटेसन, उनके बेटे तुषार वेल्लाप्पल्ली और दो अन्य पदाधिकारियों को अयोग्य घोषित कर दिया है।
अदालत ने पाया कि इन लोगों ने कई वर्षों तक संगठन से जुड़े वित्तीय दस्तावेज और वार्षिक विवरण समय पर जमा नहीं किए, जो कंपनी कानून के प्रावधानों का उल्लंघन है।
न्यायमूर्ति टी.आर. रवि की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि वर्ष 2006-07 से 2016-17 तक लगातार कई वित्तीय वर्षों के लिए वार्षिक खाते और रिटर्न दाखिल नहीं किए गए। अदालत के अनुसार यह कंपनी अधिनियम के नियमों के विरुद्ध है, इसलिए संबंधित पदाधिकारियों को पद पर बने रहने का अधिकार नहीं रह जाता। कोर्ट ने कहा कि कंपनी अधिनियम की धारा 164 और 167 के अनुसार ऐसे मामलों में निदेशकों को अयोग्य ठहराया जा सकता है और उनके पद स्वतः रिक्त माने जाएंगे।
यह फैसला SNDP योगम के कुछ सदस्यों द्वारा दायर याचिकाओं पर आया है। इन याचिकाओं में पंजीकरण महानिरीक्षक (IGR) के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें संगठन के निदेशकों को नियमों के उल्लंघन के बावजूद राहत दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि लंबे समय तक वित्तीय विवरण प्रस्तुत न करने के बावजूद पदाधिकारियों को क्लीन चिट देना कानून की भावना के विपरीत है।
हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि वेल्लाप्पल्ली नटेसन और अन्य पदाधिकारियों के पास वैध डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर (DIN) भी नहीं था, जबकि राज्य के कानून के अनुसार किसी भी गैर-व्यावसायिक कंपनी के पदाधिकारी के लिए यह अनिवार्य पहचान संख्या होती है। अदालत ने कहा कि जब तक नए पदाधिकारियों का चुनाव नहीं हो जाता, तब तक राज्य सरकार संगठन के प्रबंधन के लिए अस्थायी निदेशक नियुक्त कर सकती है।
1903 में स्थापित SNDP योगम केरल के एझवा समुदाय से जुड़ा एक प्रमुख सामाजिक संगठन है, जिसकी स्थापना समाज सुधारक श्री नारायण गुरु के विचारों से प्रेरित होकर की गई थी। यह संगठन शिक्षा, सामाजिक सुधार और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में काम करता रहा है। केरल की लगभग एक चौथाई आबादी माने जाने वाले एझवा समुदाय के बीच इस संगठन का काफी प्रभाव रहा है।
वेल्लाप्पल्ली नटेसन 1995 में SNDP योगम के महासचिव बने थे और उसके बाद से उन्होंने लंबे समय तक संगठन का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में संगठन ने कई शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों और अन्य सामाजिक परियोजनाओं का संचालन किया। समय के साथ SNDP योगम केरल की राजनीति में भी एक प्रभावशाली दबाव समूह के रूप में उभरा। नटेसन को लंबे समय तक राज्य की सत्तारूढ़ वामपंथी गठबंधन सरकार का सहयोगी माना जाता रहा है। हाल ही में उन्हें पद्म भूषण से भी सम्मानित किया गया था।
उनके बेटे तुषार वेल्लाप्पल्ली भी राजनीति में सक्रिय हैं और वे भारत धर्म जन सेना (BDJS) के अध्यक्ष हैं, जो भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा है। इस कारण SNDP योगम का प्रभाव केवल सामाजिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक समीकरणों में भी इसकी भूमिका देखी जाती रही है।
हालांकि संगठन और उसके नेतृत्व पर पहले भी कई विवाद सामने आ चुके हैं। वेल्लाप्पल्ली नटेसन के कार्यकाल में SNDP योगम पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। वर्ष 2013-14 के दौरान लगभग 15 करोड़ रुपये के एक कथित माइक्रोफाइनेंस घोटाले का मामला चर्चा में रहा था। आरोप लगाया गया था कि संगठन ने केरल राज्य पिछड़ा वर्ग विकास निगम से कम ब्याज पर ऋण लेकर उसे लाभार्थियों को अधिक ब्याज दर पर दिया। इस मामले की जांच अभी भी जारी बताई जाती है।
इसके अलावा श्री नारायण ट्रस्ट से जुड़े एक शैक्षणिक संस्थान में धन के दुरुपयोग का आरोप भी सामने आया था। कोल्लम स्थित श्री नारायण कॉलेज के स्वर्ण जयंती समारोह के लिए लगभग 1.10 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया कि इस राशि में से करीब 55 लाख रुपये नटेसन के निजी खाते में स्थानांतरित किए गए थे। हालांकि नटेसन का कहना था कि यह पैसा बाद में ट्रस्ट के खाते में वापस कर दिया गया था। इस मामले में 2020 में अपराध शाखा ने आरोपपत्र दाखिल किया था और 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने इसकी सुनवाई पर अस्थायी रोक लगा दी थी।
हाईकोर्ट के ताज़ा फैसले के बाद SNDP योगम के भविष्य को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। लंबे समय से संगठन का नेतृत्व करने वाले नटेसन की अयोग्यता को कई लोग एक युग के अंत के रूप में देख रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संगठन में नया नेतृत्व कैसे उभरता है और आने वाले समय में उसका सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव किस दिशा में जाता है।
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