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ग्रेटर नोएडा: सड़कें जान ले रही हैं, पुल जान ले रहे हैं… ग्रेटर नोएडा में युवा इंजीनियर की मौत पर राहुल गांधी का सरकार पर तीखा हमला

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ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से सामने आई एक दर्दनाक घटना ने एक बार फिर देश में बुनियादी ढांचे की बदहाली और सरकारी लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में हुई तेज बारिश के बाद जल भराव से भरी सड़क पर एक गहरे गड्ढे में डूबने से एक युवा इंजीनियर की मौत हो गई। इस घटना को लेकर कांग्रेस नेता और एलओपी राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा सड़कें जान ले रही हैं, पुल जान ले रहे हैं। यह हादसा नहीं, सिस्टम की नाकामी है।

घटना ग्रेटर नोएडा के एक रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्र को जोड़ने वाली मुख्य सड़क की बताई जा रही है, जहां भारी बारिश के बाद सड़क पूरी तरह पानी में डूबी हुई थी। इसी दौरान एक निजी कंपनी में कार्यरत इंजीनियर रोज़ की तरह दफ्तर से लौट रहे थे। सड़क पर पानी भर जाने के कारण गड्ढा दिखाई नहीं दिया और उनकी कार अचानक उसमें समा गई। देखते ही देखते वाहन पानी में डूब गया और चालक को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही हादसा हो चुका था।

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स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गड्ढा नया नहीं था, बल्कि लंबे समय से सड़क की हालत खराब थी। कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन न तो मरम्मत हुई और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया। बारिश ने इस खतरनाक गड्ढे को पूरी तरह ढक दिया, जिससे यह मौत का जाल बन गया। हादसे के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया और लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए।

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार को घेरा। उन्होंने लिखा कि आज देश में हालात ऐसे हो गए हैं कि आम आदमी की जान सबसे असुरक्षित हो गई है। उन्होंने कहा कि “कभी सड़कें, कभी पुल, कभी रेलवे ट्रैक हर जगह जान का जोखिम है। विकास के नाम पर प्रचार तो बहुत है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि बुनियादी सुविधाएं खुद लोगों की जान ले रही हैं। राहुल गांधी ने मृतक इंजीनियर के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की प्राथमिकता सिर्फ आंकड़े और इवेंट रह गए हैं, इंसानी ज़िंदगी नहीं।

राहुल गांधी एक्स पोस्ट-

https://x.com/RahulGandhi/status/2013488356127318460?s=20

कांग्रेस नेताओं ने इस हादसे को प्रशासनिक असफलता करार देते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। पार्टी का कहना है कि स्मार्ट सिटी और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के दावे तब खोखले लगते हैं, जब एक पढ़ा-लिखा युवा इंजीनियर सड़क के गड्ढे में डूबकर जान गंवा देता है। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने सवाल उठाया कि आखिर टैक्स का पैसा कहां जा रहा है और सड़क निर्माण व रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी है।

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इस हादसे ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या विकास सिर्फ उद्घाटन और विज्ञापनों तक सीमित रह गया है। राहुल गांधी का कटाक्ष इसी पीड़ा को सामने लाता है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक सड़कें और पुल आम लोगों के लिए खतरा बने रहेंगे। मृतक इंजीनियर की मौत केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उस भरोसे की भी मौत है, जो नागरिक अपने सिस्टम पर करते हैं।

फिलहाल, पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है और लोगों की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। सवाल यही है क्या यह घटना भी बाकी हादसों की तरह कुछ दिनों की सुर्खियों के बाद भुला दी जाएगी, या फिर सच में सड़कों को जानलेवा होने से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?

 

 

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