West Bengal Voter Verification: चुनाव आयोग ने बिहार के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी वोटर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इस संबंध में आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर निर्देश दिया कि राज्य के सभी निर्वाचन अधिकारी मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया को तत्काल शुरू करें।
यह कदम बिहार में इसी प्रक्रिया के तहत 1 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होने के बाद आया है, जिससे एक बार फिर चुनाव आयोग विपक्ष के निशाने पर आ गया है।
दरअसल, बिहार में जारी इस ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में लगभग 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इनमें से अधिकांश ऐसे लोग हैं जो अब जीवित नहीं हैं।
वहीं, कुछ ऐसे लोग भी हैं जो स्थायी रूप से राज्य से बाहर जा चुके हैं या जिनके नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज थे।
अधिकारियों के खिलाफ आयोग सख्त
इस बीच आयोग ने उन अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है, जिन्होंने वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की प्रक्रिया में लापरवाही बरती है।
दक्षिण 24 परगना के बरुईपुर पूर्व और पूर्व मेदिनीपुर के मोयना विधानसभा क्षेत्रों में फर्जी तरीके से नाम जोड़े जाने के मामले सामने आए हैं।
इसके बाद आयोग ने कई निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और सहायक अधिकारियों को निलंबित कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का भी आदेश दिया है।
29 जुलाई को चुनाव आयोग को सौंपी गई एक रिपोर्ट में मतदाता सूची की प्रक्रिया में गंभीर खामियां उजागर हुई।
संबंधित अधिकारियों ने डेटा सिक्योरिटी पॉलिसी का उल्लंघन किया और लॉगिन आईडी भी आपस में साझा की है।
बिहार में वोटर्स सक्रिय, राजनीतिक दल नदारद
बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के पहले चरण के दौरान आम वोटरों ने अभूतपूर्व सक्रियता दिखाई।
जहां राजनीतिक दलों की ओर से कोई औपचारिक आपत्ति या सुझाव नहीं मिला, वहीं आम नागरिकों ने 1,927 शिकायतें दर्ज कराईं।
इसके अलावा 10,977 आवेदन फॉर्म-6 के तहत नए वोटर जोड़ने, हटाने और सुधार के लिए प्राप्त हुए हैं।
चुनाव आयोग का कहना है कि ये आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि मतदाता अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं, भले ही राजनीतिक दल इस प्रक्रिया से दूरी बनाए हुए हैं।
विपक्ष का आरोप- बीजेपी के इशारे पर वोट कटाई
वहीं, चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों से अपील की है कि वे मतदाता सूची को सटीक और पारदर्शी बनाने में सहयोग करें।
आयोग ने आश्वस्त किया है कि अंतिम सूची प्रकाशित करने से पहले सभी पक्षों को पर्याप्त समय दिया जाएगा ताकि वे अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करा सकें।
हालांकि, दूसरी ओर इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने गंभीर आपत्ति जताई है।
विपक्ष ने इसे ‘वोटों की चोरी’ करार दिया है और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।
उनका आरोप है कि यह सारी कवायद भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर की जा रही है, ताकि विपक्षी वोट बैंक को कमजोर किया जा सके।
इधर, विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्षी दलों के लगभग 60 हजार बूथ लेवल एजेंट्स अब तक मतदाता सूची में किसी भी तरह की विसंगतियों को सामने नहीं ला सके हैं।
बहरहाल, पश्चिम बंगाल में यह कार्रवाई एक बड़ा संकेत है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर कोई कोताही नहीं बरतने वाला है
अब देखना होगा कि क्या यह निष्क्रियता रणनीतिक है या तैयारी की कमी? या फिर बिहार की तरह यहां भी यह बेखेड़ा खड़ा होगा ।
You may also like
-
जंतर-मंतर पुलिस एक्शन पर उठे सवाल, SC ने बनाई 5 सदस्यीय हाई पावर कमेटी
-
पत्नी पर बेवफाई का आरोप, बच्चे के ‘पैटरनिटी टेस्ट’ जांच पर SC की टिप्पणी!
-
वंदे मातरम् का शब्दार्थ और रचना की कहानी से आज विवाद तक!
-
वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर अमित शाह का हमला, बोले- तुष्टीकरण की राजनीति नहीं चलेगी
-
RSS पर बैन की मांग, भागवत के अमेरिका दौरे से पहले USCIRF का बयान
