सीजेपी हिंसा का अमेरिका कनेक्शन… भारत में तख्तापलट के लिए चीन से फंडिंग… प्रदर्शन केस में पाकिस्तान एंगल…

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सीजेपी हिंसा का अमेरिका कनेक्शन… भारत में तख्तापलट के लिए चीन से फंडिंग… प्रदर्शन केस में पाकिस्तान एंगल…

यही है हमारे देश का मेनस्ट्रीम मीडिया। देश में सरकार के खिलाफ कोई भी प्रदर्शन हो, विदेशी फंडिंग, तख्तापलट या विदेशी साजिश का एंगल निकाल ही लिया जाता है।

मजे की बात यह है कि ऐसी खबरें लगातार चलाई जाती हैं, लेकिन सरकार भी इन पर कोई संज्ञान नहीं लेती। कोई इनसे यह नहीं पूछता कि जब रॉ, आईबी, एनटीआरओ और डीआईए जैसी खुफिया एजेंसियां ऐसे एंगल नहीं तलाश पा रही हैं, तब हमारे देश के न्यूज चैनल स्टूडियो में बैठे-बैठे कैसे बता देते हैं कि फलां-फलां देश की साजिश है?

गजब की बात तो यह है कि एक चैनल अमेरिका की साजिश बता रहा है, तो दूसरा चीन की।

यानी फैक्ट जाए तेल लेने, कुछ भी चला दो। मालूम है कि सरकार की चरणवंदना में कुछ भी दिखा दो, कोई पूछने वाला नहीं है।

पीएम मोदी के करीबी सांसद निशिकांत दुबे का तर्क है कि विदेशी ताकतों ने विद्यार्थियों के आक्रोश को अपने अधीन कर लिया है। उनका कहना है कि यह आंदोलन अब देशद्रोही ताकतों द्वारा चलाया जा रहा है।

मान लिया… लेकिन फिर सरकार क्या कर रही है? घुइयां छील रही है क्या?

गृहमंत्री अमित शाह क्या कर रहे हैं? अगर विदेशी फंडिंग के सबूत हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं करते?

बात-बात में दूसरे देशों के राजदूतों को तलब करने वाली सरकार इतने बड़े मसले पर संबंधित देशों को क्यों नहीं बुलाती? अगर सबूत हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं? आखिर किस शुभ मुहूर्त और शुभ घड़ी का इंतजार है?

सच तो यह है कि पुलिस प्रशासन और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट्स में ऐसा कुछ सामने नहीं आया है। लेकिन मीडिया सब कुछ दिखा सकता है, क्योंकि यह सरकार के समर्थन में एक नैरेटिव तैयार करने का काम करता है।

यही है हमारे देश का वह मीडिया, जिसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। इसकी मानसिकता देखिए। जिस पाकिस्तान के पास खाने के लिए आटा तक नहीं है, उसका भी एंगल जोड़ दिया जाता है।

क्या यह बात पचने वाली है?

वैसे किसान आंदोलन में भी यही हेडलाइन जोड़ी गई थी। पहलवान आंदोलन में भी यही एंगल दिखाया गया। नोएडा, फरीदाबाद, पानीपत और दिल्ली में सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर हुए आंदोलनों में भी यही नैरेटिव बनाया गया। अग्निवीर योजना के विरोध, आदिवासी आंदोलन, मणिपुर आंदोलन और सोनम वांगचुक के आंदोलन के तार भी चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान से जोड़ दिए गए।

मतलब अब देश का नागरिक अगर विरोध करेगा, तो उसका कनेक्शन भी इन्हीं देशों से जोड़ दिया जाएगा। कमाल है।

अगर वाकई ऐसा है, तो फिर यह हमारे गृह मंत्री और सरकार की ही नाकामी मानी जाएगी। इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी बनती है? यह भी तो बताइए।

इधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया है कि पेपर लीक के दोषियों को सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

प्रधानमंत्री का यह ऐलान कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और विपक्ष के प्रदर्शन के बीच आया है। सीजेपी पिछले 34 दिनों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है।

वहीं, एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक पिछले 26 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। फिलहाल वे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका इलाज चल रहा है।

प्रधानमंत्री के बयान पर राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए लिखा कि “आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। आपने एजुकेशन सिस्टम को बर्बाद होने दिया और इसके जिम्मेदार लोगों को संरक्षण दिया।”

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