श्रीअमरनाथमी यात्रा में तीन में 56 हजार श्रद्धालओं ने किये दर्शन
अमरनाथ यात्रा जाने वालों को ये खबर थोड़ा झटका दे सकती है। यात्रा के तीसरे ही दिन पवित्र शिवलिंग का आकार सिर्फ एक फ़ीट रह गया। इससे बहुत संभव है यात्रा के एक सप्ताह में ही शिवलिंग पूरी तरह से पिघल जाए। सोमवार को एक फीट के बाबा बर्फानी की फोटो सामने आई। 57 दिन चलने वाली यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी। बड़ा सवाल यही है कि यदि शिवलिंग पूरा पिघल जाएगा तो क्या 57 दिन ये यात्रा रहेगी। हजारों भक्तों को शिवलिंग के दर्शन भी नहीं हो सकेंगे।
पिछले 3 दिनों में 56 हजार से ज्यादा तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। यह आंकड़ा पिछले साल से 18.6% ज्यादा रहा। 2025 में पहले तीन दिन में 47,972 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। यात्रा के लिए इस साल 4 लाख श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। 23 मई को BSF के जवानों ने जो तस्वीर जारी की थी, उसमें शिवलिंग का आकार करीब 7 फीट था। 29 जून को पहली पूजा के दिन भी हिमलिंग की ऊंचाई 5 फीट से ज्यादा थी। 6 जुलाई को सामने आई तस्वीर में हिमलिंग लगभग 90% गायब हो चुका है।
48 किमी लंबे नुनवान-पहलगाम रूट और 14 किमी वाले छोटे, लेकिन कठिन बालटाल रूट से लगातार यात्री दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। यात्रा 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन खत्म होगी। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बिना रजिस्ट्रेशन करवाए अमरनाथ पहुंच रहे यात्रियों से कहा है कि वे अपनी यात्रा कुछ दिन के लिए टाल दें। प्रशासन के मुताबिक, 9 जुलाई तक सभी रजिस्ट्रेशन स्लॉट पूरी तरह भर चुके हैं।
ऐसे में अगर कोई यात्री बिना रजिस्ट्रेशन बालटाल या पहलगाम रूट से आगे बढ़ने की कोशिश करेगा तो उसे चेक पॉइंट्स पर रोक दिया जाएगा। उसे 9 जुलाई के बाद ही आगे बढ़ने दिया जाएगा।अधिकारियों ने कहा कि रविवार से केवल रजिस्टर्ड यात्री ही कश्मीर की ओर जाने की अनुमति दी जाएगी।
अमरनाथ के बाबा बर्फानी प्राकृतिक बनते हैं, तराशा नहीं जाता
अमरनाथ का हिम शिवलिंग किसी बर्फ के ब्लॉक को तराशकर नहीं बनाया जाता, बल्कि यह प्राकृतिक आइस स्टैलेग्माइट है। जैसे चूना-पत्थर की गुफाओं में जमीन से खनिज जमा होकर स्टैलेग्माइट बनते हैं, उसी तरह अमरनाथ गुफा में छत से टपकने वाला पानी जमकर बर्फ का शिवलिंग बनाता है।इसका आकार हर साल मौसम, तापमान और पानी की उपलब्धता के अनुसार अलग-अलग होता है। यही इसकी सबसे अनोखी विशेषता है। अमरनाथ यात्रा दो रास्तों से की जाती है। पारंपरिक रास्ता 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम से है। दूसरा रास्ता गांदरबल जिले में 14 किलोमीटर लंबे बालटाल से है। यात्रा 28 अगस्त को खत्म होगी।
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