रिंकू सिंह

रिंकू सिंह: ने शेयर किया भगवान हनुमान का AI वीडियो, करणी सेना ने जताया विरोध

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रिंकू सिंह (भारतीय क्रिकेटर)  एक बार फिर सोशल मीडिया को लेकर चर्चा में आ गए हैं। इस बार वजह कोई क्रिकेटिंग उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके द्वारा शेयर किया गया एक AI से बना वीडियो है। रिंकू सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भगवान हनुमान से जुड़ा एक AI वीडियो साझा किया, जिसमें हनुमान जी को गाड़ी चलाते हुए दिखाया गया है। वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई और मामला धीरे-धीरे विवाद का रूप लेने लगा।

जहां एक वर्ग ने इस वीडियो को आस्था, भक्ति और आधुनिक तकनीक के मेल के रूप में देखा, वहीं कई संगठनों और यूजर्स ने इसे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला बताया। खास तौर पर करणी सेना ने इस वीडियो को लेकर कड़ा ऐतराज जताया है।

करणी सेना ने बयान जारी कर कहा कि इस तरह के वीडियो “जिहादी मानसिकता” को दर्शाते हैं और हिंदू देवी-देवताओं का मज़ाक उड़ाने जैसा है।

करणी सेना का कहना है कि भगवान हनुमान करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक हैं और उन्हें इस तरह आधुनिक या काल्पनिक दृश्यों में दिखाना धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ है। संगठन ने यह भी मांग की है कि रिंकू सिंह इस वीडियो को तुरंत हटाएं और सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। साथ ही भविष्य में इस तरह के कंटेंट से बचने की चेतावनी भी दी गई है।

विवाद बढ़ने के बाद सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ लोगों ने रिंकू सिंह का समर्थन करते हुए कहा कि AI वीडियो का उद्देश्य किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था, बल्कि यह भक्ति को नए तरीके से प्रस्तुत करने की एक कोशिश थी। समर्थकों का तर्क है कि टेक्नोलॉजी के दौर में आस्था के डिजिटल रूप सामने आना स्वाभाविक है और हर चीज को विवाद से जोड़ना सही नहीं है। (“जिहादी मानसिकता”)

हालांकि, दूसरी ओर आलोचकों का कहना है कि धार्मिक प्रतीकों के इस्तेमाल में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, खासकर जब व्यक्ति एक राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी और युवा वर्ग का रोल मॉडल हो। उनका मानना है कि प्रसिद्ध हस्तियों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है, क्योंकि उनके हर पोस्ट का समाज पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

इस पूरे मामले पर अभी तक रिंकू सिंह की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। न ही उन्होंने वीडियो को हटाने या माफी मांगने को लेकर कोई सार्वजनिक बयान दिया है। ऐसे में यह विवाद और गहराने की संभावना जताई जा रही है।

यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बने धार्मिक कंटेंट की सीमा क्या होनी चाहिए। जहां एक ओर तकनीक रचनात्मक अभिव्यक्ति के नए रास्ते खोल रही है, वहीं दूसरी ओर आस्था और संवेदनशीलता से जुड़े विषयों में संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।

कुल मिलाकर, क्रिकेटर रिंकू सिंह द्वारा शेयर किया गया यह AI वीडियो अब सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट नहीं रह गया है, बल्कि धार्मिक भावना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक जिम्मेदारी के बीच चल रही बहस का हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि इस विवाद पर संबंधित पक्ष क्या रुख अपनाते हैं और क्या इससे AI कंटेंट को लेकर कोई नई बहस या दिशा तय होती है

 

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