कार्यकर्ता अपने खर्च पर 500 से 600 किमी की यात्रा कर जनता के बीच जाते हैंऔर देखते कांग्रेस के नेताओं का ध्यान सिर्फ इस पर रहता है कि दिल्ली से आए नेता को चिकन सैंडविच समय पर मिला या नहीं
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गुजरात चुनाव से पहले कांग्रेस को राज्य में बड़ा झटका लगा है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष और पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। अपना इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंपा।
इस्तीफे के साथ उन्होंने पार्टी के नेताओं की जमकर खिचाई की। हार्दिक ने लिखा है कि कांग्रेस के बड़े नेता सिर्फ मोबाइल और चिकेन सेंडविच में लगे हुए हैं। वही हार्दिक ने मोदी सरकार की तारीफ में कसीदे भी पढ़े।
इस्तीफे में हार्दिक ने लिखा…
हार्दिक पटेल ने इस्तीफे की जानकारी ट्विटर पर दी। उन्होंने लिखा, “आज मैं हिम्मत करके कांग्रेस पार्टी के पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूँ।
मुझे विश्वास है कि मेरे इस निर्णय का स्वागत मेरा हर साथी और गुजरात की जनता करेगी। मैं मानता हूं कि मेरे इस कदम के बाद मैं भविष्य में गुजरात के लिए सच में सकारात्मक रूप से कार्य कर पाऊँगा।”
चिकन सैंडविच पर रहता है कांग्रेस नेताओं का ध्यान
हार्दिक पटेल ने लिखा कि अनेक प्रयासों के बाद भी कांग्रेस पार्टी द्वारा देशहित एवं समाज हित के बिल्कुल विपरीत कार्य करने के कारण मैं पार्टी से इस्तीफा दे रहा हूं।
देश के युवा एक सक्षम और मजबूत नेतृत्व चाहते हैं, लेकिन कांग्रेस पार्टी सिर्फ विरोध की राजनीति तक सीमित रह गई है।
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जबकि, देश के लोगों को विरोध नहीं, ऐसा विकल्प चाहिए जो भविष्य के बारे में सोचता हो। उन्होंने कहा, हमारे कार्यकर्ता अपने खर्च पर 500 से 600 किमी की यात्रा कर जनता के बीच जाते हैं और देखते गुजरात कांग्रेस के बड़े नेताओं का ध्यान सिर्फ इस पर रहता है कि दिल्ली से आए नेता को चिकन सैंडविच समय पर मिला या नहीं।
हार्दिक पटेल ने सीधे तौर पर मोदी सरकार या भाजपा का नाम तो नहीं लिया, लेकिन अपने इस्तीफे में पाटीदार नेता ने लिखा कि अयोध्या में राम मंदिर हो, सीएए-एनआरसी का मुद्दा हो, कश्मीर में अनुच्छेद 370 हो या जीएसटी लागू करने का निर्णय…देश लंबे समय से इन समस्याओं का समाधान चाहता था और कांग्रेस पार्टी सिर्फ इसमें एक बाधा बनने का काम करती रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में गंभीरता की कमी है। मैं जब भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से मिला तो लगा उनका ध्यान गुजरात के लोगों से ज्यादा अपने मोबाइल और बाकी चीजों पर रहा। जब देश में संकट था तो हमारे नेता विदेश में थे।
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