Trump $1 Coin

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डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी तस्वीर $1 के सिक्के पर छपवाई, क्या यह भारत में संभव है!

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डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी तस्वीर $1 के सिक्के पर छपवाई, क्या यह भारत में संभव है!

2 सितंबर 2026 को अमेरिकी टकसाल ने आधिकारिक तौर पर वह “गोल्डन डॉलर” सिक्का जारी कर दिया, जिस पर मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तस्वीर छपी है। यह अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में जारी किया गया विशेष $1 सिक्का है, जिसे फिलाडेल्फिया टकसाल में ढाला गया।

सिक्के के अगले हिस्से पर लिबर्टी, इन गॉड वी ट्रस्ट और 1776–2026 लिखा है, और डिज़ाइन व्हाइट हाउस की एक तस्वीर पर आधारित है। खास बात यह है कि 4 जुलाई को ढाले गए 2.5 लाख सिक्कों पर एक विशेष जुलाई 4 प्रिवी मार्क भी है।

इस सिक्के ने ट्रम्प को पिछले सौ साल में पद पर रहते हुए मुद्रा पर छपने वाले पहले जीवित अमेरिकी राष्ट्रपति बना दिया है। इससे पहले सिर्फ 1926 में तत्कालीन राष्ट्रपति कैल्विन कूलिज को जॉर्ज वॉशिंगटन के साथ एक स्मारक अर्ध-डॉलर सिक्के पर दिखाया गया था वह भी सामान्य प्रचलन का सिक्का नहीं था।

कानूनी आधार क्या है

अमेरिका में गृहयुद्ध के बाद 1866 में एक कानून बना था, जिसके तहत किसी भी जीवित व्यक्ति की तस्वीर अमेरिकी मुद्रा पर नहीं छापी जा सकती ताकि सत्ता में बैठे नेताओं की पूजा और राजनीतिक प्रचार को रोका जा सके। लेकिन ट्रम्प प्रशासन का तर्क है कि 2020 में पारित Circulating Collectible Coin Redesign Act जिस पर ट्रम्प ने खुद अपने पहले कार्यकाल में हस्ताक्षर किए थे।

ट्रेजरी सचिव को अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के लिए विशेष $1 सिक्का जारी करने का अधिकार देता है। यह पुराना कानून सिक्के के पिछले हिस्से पर किसी व्यक्ति की तस्वीर छापने से रोकता है, लेकिन ट्रम्प की तस्वीर सिक्के के अगले हिस्से पर है इसलिए प्रशासन का दावा है कि यह कानूनी रूप से सही है। इस पर विवाद अभी बना हुआ है, और $250 के नोट पर भी ट्रम्प की तस्वीर छापने का प्रस्ताव कांग्रेस में लंबित है।

दुनिया में यह कितना आम है

एक शोध जिसमें 165 देशों के करीब 1,000 सिक्कों का विश्लेषण किया गया है के अनुसार दुनिया के सिर्फ 22 देश (करीब 13%) ऐसे हैं जिनके प्रचलन में मौजूद सिक्कों पर उनके मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की तस्वीर होती है। इनमें लगभग सभी राजतंत्र हैं जैसे ब्रिटेन, जापान, थाईलैंड, सऊदी अरब, मोरक्को आदि जहाँ राजा या रानी की तस्वीर उनके शासनकाल में स्वाभाविक रूप से मुद्रा पर होती है।

लोकतांत्रिक गणराज्यों में यह लगभग न के बराबर होता है। जिन नेताओं ने पद पर रहते हुए अपनी तस्वीर मुद्रा पर छपवाई, उनमें ज़्यादातर तानाशाह या सत्तावादी शासक रहे हैं। जैसे इराक के सद्दाम हुसैन, लीबिया के मुअम्मर गद्दाफ़ी, युगांडा के ईदी अमीन, मलावी की हेस्टिंग्स बांडा और फिलीपींस के फर्डिनेंड मार्कोस। यही वजह है कि आलोचक इसे व्यक्ति-पूजा से जोड़कर देखते हैं, न कि सामान्य डेमोक्रेटिक परंपरा से।

इसका एक अपवाद है ‘बोत्सवाना’ एक लोकतांत्रिक गणराज्य, जहाँ परंपरागत रूप से 10-पुला के नोट पर मौजूदा राष्ट्रपति की तस्वीर छापी जाती रही है।

लेकिन क्या यह अन्य लोकतांत्रिक देशों में संभव है?

सैद्धांतिक रूप से हाँ, संभव है क्योंकि ज़्यादातर देशों में मुद्रा डिज़ाइन तय करने का अधिकार सरकार या केंद्रीय बैंक के पास होता है, और कानून बदलकर या नई व्यवस्था बनाकर ऐसा किया जा सकता है जैसा अमेरिका में 2020 के कानून के ज़रिए हुआ। लेकिन व्यवहार में ऐसा बहुत कम होता है,

क्योंकि भारत, फ्रांस, जर्मनी जैसे लोकतंत्रों में मुद्रा पर सिर्फ दिवंगत राष्ट्रीय नायकों जैसे भारत में महात्मा गांधी को जगह देने की परंपरा है, ताकि यह संदेश जाए कि सत्ता किसी व्यक्ति की नहीं, संस्था और जनता की है।

कई देशों में स्पष्ट कानून हैं जो जीवित/पदस्थ नेता की तस्वीर मुद्रा पर छापने से रोकते हैं जैसे अमेरिका का 1866 का कानून।
ऐसा कदम अक्सर विवाद खड़ा करता है जैसा अमेरिका में हो रहा है, जहाँ इसे राजशाही जैसी महत्वाकांक्षा कहकर आलोचना हो रही है और “No Kings” नाम से विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।

तकनीकी रूप से किसी भी लोकतांत्रिक देश की सरकार कानून बदलकर या विशेष प्रावधान बनाकर अपने पदस्थ नेता की तस्वीर मुद्रा पर छपवा सकती है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से यह लोकतांत्रिक परंपरा के विपरीत माना जाता रहा है और इसे अक्सर राजनीतिक विवाद व आलोचना का सामना करना पड़ता है

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