वंदे मातरम् को लेकर कांग्रेस पर अमित शाह का हमला, बोले- तुष्टीकरण की राजनीति नहीं चलेगी
वंदे मातरम् को लेकर देश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस कार्यसमिति यानी CWC के उस फैसले के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर निशाना साधा है,
जिसमें पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के केवल शुरुआती दो अंतरे गाने की बात कही गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस फैसले को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि पार्टी ने एक बार फिर तुष्टीकरण की राजनीति को आगे बढ़ाया है।
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस का वंदे मातरम् को पूरा नहीं गाने का फैसला कोई सामान्य निर्णय नहीं है, बल्कि यह उस पुराने राजनीतिक रुख की याद दिलाता है, जिसे लेकर भाजपा लंबे समय से कांग्रेस की आलोचना करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने करीब 90 साल पहले भी वंदे मातरम् को लेकर ऐसा ही रुख अपनाया था और अब उसी फैसले को दोबारा आगे बढ़ाया जा रहा है।
#WATCH | Chengalpattu, Tamil Nadu | On Congress’s CWC resolution on Vande Mataram, Union Home Minister Amit Shah says, “Yesterday, Congress Working Committee took an anti-national decision. Following their 1937 resolution, Congress decided to sing only two stanzas of Vande… pic.twitter.com/9BmI4PJKml
— ANI (@ANI) August 20, 2026
गृह मंत्री ने 1937 के कांग्रेस के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय पार्टी ने वंदे मातरम् के कुछ हिस्सों को लेकर आपत्तियों के बीच इसके गायन को सीमित करने का निर्णय लिया था। अमित शाह का आरोप है कि उस समय लिया गया फैसला मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति से प्रभावित था।
उन्होंने कहा कि इसी तरह की राजनीति के कारण देश के विभाजन की परिस्थितियां मजबूत हुईं और आगे चलकर पाकिस्तान का निर्माण हुआ।
अमित शाह ने कांग्रेस के मौजूदा फैसले को भी इसी राजनीतिक सोच से जोड़ते हुए कहा कि देश में अब तुष्टीकरण की राजनीति नहीं चलनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे कांग्रेस के इस निर्णय के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं और वंदे मातरम् के सम्मान को लेकर एकजुट हों।
भाजपा ने भी इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर हमला तेज कर दिया है और इसे राष्ट्रगीत के सम्मान से जोड़कर जनता के सामने रखने की कोशिश की है।
दूसरी ओर कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष स्पष्ट किया है। कांग्रेस का कहना है कि वंदे मातरम् को लेकर पार्टी की स्थिति पहले से साफ है और इसमें किसी तरह का भ्रम नहीं है।
पार्टी ने 1937 में लिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उस समय महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं की मौजूदगी में यह निर्णय लिया गया था और कांग्रेस आज भी उसी फैसले के साथ खड़ी है।
वंदे मातरम् भारत के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण गीत रहा है और इसके सम्मान को लेकर देश में लंबे समय से भावनात्मक जुड़ाव रहा है। ऐसे में कांग्रेस के फैसले के बाद शुरू हुआ राजनीतिक विवाद आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है।
एक तरफ भाजपा इसे तुष्टीकरण और राष्ट्रगीत के सम्मान का मुद्दा बता रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस अपने पुराने ऐतिहासिक फैसले को सही ठहरा रही है। अब देखना होगा कि वंदे मातरम् का यह मुद्दा आने वाले राजनीतिक विमर्श में कितना बड़ा रूप लेता है।
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