कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी राज्यपाल ने भी नहीं दी। कांग्रेस ने फैसले पर सवाल उठाए।
मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह से जुड़े कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में एक बार फिर सरकार के रुख की पुष्टि हुई है। राज्य सरकार की कैबिनेट के बाद अब राज्यपाल ने भी विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देने से इनकार कर दिया है।
इसके साथ ही मंत्री के खिलाफ इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई का रास्ता फिलहाल रुक गया है। मामला ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है।
इस टिप्पणी को लेकर देशभर में विवाद हुआ था और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। जांच के लिए गठित विशेष जांच दल यानी एसआईटी अपनी जांच पूरी कर चुकी है, लेकिन इसके बावजूद अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिलने से राजनीतिक विवाद फिर तेज हो गया है।
पिछले सप्ताह मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार की कैबिनेट ने विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद निर्णय राज्यपाल के स्तर पर पहुंचा था। अब राज्यपाल की ओर से भी कैबिनेट के फैसले से अलग रुख नहीं अपनाया गया है।
कांग्रेस ने इसे लेकर राज्य सरकार और राजभवन पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि गंभीर आरोपों के बावजूद मंत्री को लगातार राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।
कांग्रेस के प्रदेश नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में पार्टी के विधायक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर पूरे मामले पर पुनर्विचार करने और विजय शाह के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग भी की थी।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कर्नल सोफिया कुरैशी भारतीय सेना की अधिकारी हैं और उनके खिलाफ की गई टिप्पणी केवल किसी व्यक्ति विशेष से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि सेना के सम्मान और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा से जुड़ा मामला है।
कांग्रेस ने राज्यपाल से आग्रह किया कि अभियोजन की अनुमति देने के फैसले पर दोबारा विचार किया जाए। पार्टी ने यह भी सवाल उठाया कि जब मामले की जांच पूरी हो चुकी है और न्यायिक स्तर पर भी टिप्पणी को लेकर गंभीरता दिखाई जा चुकी है, तो फिर अभियोजन की स्वीकृति रोकने का आधार क्या है।
कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने भी राज्यपाल के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्यपाल प्रदेश में संविधान और कानून के संरक्षक होते हैं, ऐसे में विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की अनुमति नहीं देना कई सवाल खड़े करता है।
मिश्रा ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के फैसले के बाद राजभवन का रुख भी उसी दिशा में जाना संवैधानिक पद की निष्पक्षता को लेकर चिंता पैदा करता है। उन्होंने अपने बयान में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि मामला गंभीर और संज्ञेय अपराधों से संबंधित है।
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत ऑपरेशन सिंदूर के दौरान विजय शाह की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई टिप्पणी से हुई थी। बयान सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी।
मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग उठी और सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी को लेकर सख्त रुख अपनाया था। इसके बाद जांच प्रक्रिया आगे बढ़ी और एसआईटी ने मामले की पड़ताल की। अब जांच पूरी होने के बावजूद अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलने से विपक्ष सरकार पर हमलावर है।
कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी मंत्री पर गंभीर टिप्पणी और सेना की अधिकारी के अपमान से जुड़ा मामला सामने आता है, तो कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। पार्टी ने राज्यपाल से निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से इस फैसले पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस इस फैसले को किस कानूनी मंच पर चुनौती देती है और आगे अदालत का रुख क्या रहता है। मामले में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव न्यायिक प्रक्रिया ही होगी, जहां अभियोजन की अनुमति और संबंधित कानूनी प्रावधानों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
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