गृहमंत्री अमित शाह घुसपैठियों पर सख्त, कहा- भारत कोई धर्मशाला नहीं!
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश की आंतरिक सुरक्षा और अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर सख्त रुख दोहराया है। इंटेलिजेंस ब्यूरो की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजीज कॉन्फ्रेंस के दौरान शाह ने कहा कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है और देश में रहने का अधिकार उसके नागरिकों का है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य कम से कम समय में देश को घुसपैठियों से मुक्त करना है। गृह मंत्री ने घुसपैठ को राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय संतुलन से जुड़ी चुनौती बताया।
अमित शाह ने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा को लेकर केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। उन्होंने पिछले आठ महीनों के दौरान सीमा से जुड़े राज्यों के दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि इन राज्यों के साथ सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चार-स्तरीय रणनीति पर काम किया जा रहा है।
उनका जोर इस बात पर था कि सीमा पार से होने वाली घुसपैठ और उससे जुड़े नेटवर्क को शुरुआती स्तर पर ही रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों को लगातार सक्रिय रहना होगा।
Addressed the concluding session of the 9th two-day National Security Strategies Conference 2026, in New Delhi today.
This conference has evolved into a robust forum for developing strategies and anticipating emerging challenges to national security. Under the leadership of Modi… pic.twitter.com/yodCLXCEzb
— Amit Shah (@AmitShah) August 25, 2026
गृह मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ सरकार की रणनीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए PRAHAR रणनीति को नियमित कार्रवाई का हिस्सा बनाया जाएगा।
शाह के मुताबिक, देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने लंबे समय से मौजूद नक्सलवाद, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और पूर्वोत्तर के उग्रवाद जैसी प्रमुख चुनौतियों पर सरकार ने महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने इसके लिए राज्य पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के समन्वित प्रयासों को श्रेय दिया।
शाह ने सुरक्षा व्यवस्था को भविष्य की चुनौतियों के हिसाब से तैयार करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजीज फोरम को अगले 15 से 20 वर्षों में सामने आ सकने वाले सुरक्षा खतरों का अनुमान लगाकर पहले से रणनीति तैयार करनी चाहिए।
खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए अपराध के बदलते तरीकों को पहचानने और उनसे जुड़ी खुफिया जानकारी विकसित करने की जरूरत बताई गई।
गृह मंत्री ने आपराधिक न्याय व्यवस्था में लागू किए गए तीन नए कानूनों को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अगले एक साल में इन कानूनों को पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। उनके अनुसार, इससे आपराधिक मामलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज होगी और सुप्रीम कोर्ट तक मामलों के तीन साल के भीतर निपटने की दिशा में मदद मिलेगी। उन्होंने सजा की दर में भी बढ़ोतरी की उम्मीद जताई।
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