मुसाफिर दो, सफर एक, रास्ता एक, मंजिल एक…जब ट्रेन में हुई जीतू पटवारी और खण्डेलवाल की मुलाकात!

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मुसाफिर दो, सफर एक, रास्ता एक, मंजिल एक…जन ट्रेन में हुई जीतू पटवारी और खण्डेलवाल की मुलाकात!

राह में उनसे मुलाकात हो गई… जिससे डरते थे वही बात हो गई… जी हां, यह मशहूर फिल्मी तराना इन दिनों मध्य प्रदेश की सियासत और खासकर दतिया के सियासी घटनाक्रम पर बिल्कुल सटीक बैठता है। जरा इस सियासी तस्वीर के समीकरणों को समझिए मुसाफिर दो, सफर एक, रास्ता एक, मंजिल एक… लेकिन मुकाम तक पहुंचेगा सिर्फ कोई एक!

दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए जारी शह-मात के इस दिलचस्प खेल के बीच एक बेहद अनूठी सियासी तस्वीर सामने आई है। उपचुनाव में अपनी-अपनी पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए दतिया दौरे पर निकले भाजपा और कांग्रेस के दोनों प्रदेश अध्यक्षों की ट्रेन में आमने-सामने मुलाकात हो गई। उपचुनाव की भारी गहमागहमी और कड़े मुकाबले के बीच दोनों प्रतिद्वंद्वी दलों के इन शीर्ष नेताओं की औचक मुलाकात ने प्रदेश के सियासी गलियारों में चर्चा का बाजार पूरी तरह गर्म कर दिया है।

जब टकराए हेमंत खंडेलवाल और जीतू पटवारी

दरअसल, दतिया में चल रही चुनावी तैयारियों का मोर्चा खुद संभालने के लिए दोनों दलों के प्रदेश अध्यक्ष—भाजपा के हेमंत खंडेलवाल और कांग्रेस के जीतू पटवारी, एक ही ट्रेन से सफर कर रहे थे। सफर के दौरान जैसे ही ट्रेन की बोगी में दोनों नेताओं का आमना-सामना हुआ, माहौल पूरी तरह से राजनीतिक रंग में ढल गया।

उपचुनाव की कड़वाहट और मंचों से चलने वाले तीखे बयानों से दूर, ट्रेन के सफर में दोनों प्रमुखों के बीच बेहद सहज माहौल में लंबी राजनीतिक चर्चा हुई। हालांकि, इस अनौपचारिक बातचीत में किन गुप्त मुद्दों पर मंथन हुआ, इसका कोई आधिकारिक ब्यौरा तो सामने नहीं आया है, लेकिन इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आग की तरह तेजी से वायरल हो रही हैं।

अवधेश नायक को मनाने पहुंचे मुकेश नायक

ट्रेन की इस मुलाकात से इतर, दतिया की जमीन पर बगावत को रोकने का एक और बड़ा सियासी ड्रामा देखने को मिला। उपचुनाव में कांग्रेस का टिकट नहीं मिलने के बाद से लगातार नाराज चल रहे अवधेश नायक को मनाने की कोशिशें अब सुपरफास्ट मोड में आ गई हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस के पूर्व मंत्री मुकेश नायक, पार्टी प्रवक्ताओं की पूरी टोली के साथ सुबह-सुबह सीधे अवधेश नायक के निवास पर धमक गए।

यहाँ दोनों नेताओं के बीच करीब 25 मिनट तक बंद कमरे में गुप्त चर्चा हुई। इस मुलाकात के बाद जिले की सियासत में कयासों का दौर सातवें आसमान पर पहुंच गया है। दरअसल, कांग्रेस नेतृत्व को इस बात की गहरी आशंका है कि नाराज अवधेश नायक कहीं वापस भाजपा में ‘घर वापसी’ न कर लें। इसी डर की वजह से उन्हें हर कीमत पर कांग्रेस में बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

‘घर वापसी’ की ताक में भाजपा, कार्यकर्ताओं पर टिकी नजर

दूसरी ओर, भाजपा भी इस बहती गंगा में हाथ धोने से पीछे नहीं हट रही है। भाजपा रणनीतिक रूप से अवधेश नायक को अपने पाले में लाने की पूरी कोशिश में जुटी है। इससे पहले भाजपा के कई मंत्री और वरिष्ठ नेता भी उनके घर पहुंचकर बंद कमरे की बातचीत कर चुके हैं।

हालांकि, इस पूरे सियासी घटनाक्रम और मान-मनौव्वल के बीच अवधेश नायक ने अब तक अपने अगले कदम को लेकर पत्ते नहीं खोले हैं। मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में कहा, “हम अपने कार्यकर्ताओं से सलाह-मशविरा लेकर ही कोई अंतिम निर्णय करेंगे।

दतिया उपचुनाव के इस कड़े मुकाबले के बीच अवधेश नायक का अगला फैसला भाजपा और कांग्रेस, दोनों के लिए हार-जीत का टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि ट्रेन का यह दोस्ताना सफर और बंद कमरों की यह रणनीतिक मुलाकातें दतिया की चुनावी तकदीर में क्या नया मोड़ लेकर आती हैं

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